निरंजनी अखाड़ा से निष्कासित संत आनंद गिरि को भेजा कानूनी नोटिस

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*संत आनंद गिरि ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी जान की रक्षा की गुहार लगाई*

श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े से निकाले गए आनंद गिरि महाराज की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही है, हरिद्वार न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण भदोरिया ने आनंद गिरी को कानूनी नोटिस भेजकर 1 सप्ताह के भीतर महंत नरेंद्र गिरि से माफी मांगने की मांग की है, ऐसा न करने पर आनंद गिरि के खिलाफ संबंधित कोर्ट में मुकदमा दर्ज करने की भी चेतावनी दी गई है, अरुण भदोरिया ने आनंद गिरि को कानूनी नोटिस भेजकर कहा है कि श्री महंत नरेंद्र गिरि महाराज अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं और उनके नेतृत्व में कुंभ मेला 2021 सकुशल संपन्न हुआ है इसके अलावा वह सनातन धर्म का प्रचार प्रसार भी करते हैं, निर्धन कन्याओं की शादी सहित गरीब और जरूरतमंदों की मदद करके समाज के उत्थान के लिए काम करते हैं, जिसकी वजह से मेरी और काफी लोगों की उनके साथ भावनाएं जुड़ी हुई हैं, उन्होंने आप की जांच करा कर और आरोप सिद्ध होने पर कि आपने लेटे हनुमान मंदिर की गद्दी का धन दुरुपयोग करते हुए सन्यास की परंपरा का उल्लंघन किया है अपने घरवालों से संबंध रखते हुए उन्हें नाजायज लाभ पहुंचाया है उसके बाद आपको अखाड़े से निकाल दिया गया है। जिसके बाद आप समाचार पत्रों में और सोशल मीडिया पर महंत नरेंद्र गिरि के खिलाफ झूठे और अनर्गल बयान जारी कर रहे हैं जिसके लिए आप स्वयं जिम्मेदार हैं अतः आपको यह कानूनी नोटिस भेजा जा रहा है आप नोटिस मिलने के 1 सप्ताह के भीतर नरेंद्र गिरी महाराज से माफी मांगे और लिखित में दे कि भविष्य में इवृत्ति नहीं होगी ऐसा न करने पर आपके खिलाफ सक्षम न्यायालय में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। अपने निष्कासन के बाद महामंडलेश्वर संत आनंद गिरि ने अपनी जान को खतरा बताते हुए प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, तथा पुलिस द्वारा अधिकारियों को पत्र लिखकर अपनी जान की सुरक्षा की मांग की है पत्र में आरोप लगाया है के अखाड़े की संपत्तियों को खुर्द-बुरद करने के लिए उसका निष्कासन किया गया है। शांता आनंद गिरि ने कहा है की अखाड़े के दो युवा संतों की आत्महत्या की जांच कराई जानी चाहिए।