कुट्टू के आटे के 9 सैंपल जांच के लिए स्टेट लैब भेजे गए

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मिलावटखोरों के हौसले बुलंद
हरिद्वार। सैंपलिग रिपोर्ट में देरी और लंबी विभागीय प्रक्रिया के चलते मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं। सामान्य तौर पर 14 दिन में आने वाली सैंपल की रिपोर्ट महीनेभर या डेढ़ महीने में आती है। इतना ही नहीं यदि स्टेट लैब की रिपोर्ट में सैंपल फेल आता है और कारोबारी संतुष्ट नहीं है तो वह इसे जांच के लिए सेंट्रल लैब (रेफरल लैब) भेज सकता है। अमूमन सेंट्रल लैब की रिपोर्ट आने में भी डेढ़ महीने लग जाते हैं। लेकिन, पिछले साल अक्टूबर में लिए जिस कुट्टू के आटे का सैंपल राज्य प्रयोगशाला से फेल आया था। उसकी सेंट्रल लैब से रिपोर्ट अब तक खाद्य सुरक्षा विभाग के हाथ नहीं लगी है। कुट्टू के आटे से बने खाद्य पदार्थ खाने से सेहत बिगड़ने की दो साल में तीसरी घटना खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रही है। बीती रविवार को हरिद्वार जिले में कुट्टू के आटे से बने खाद्य पदार्थ खाकर 126 श्रद्धालुओं की सेहत बिगड़ने पर विभागीय टीम ने जिले से नौ सैंपल लिए, जिसे जांच के लिए स्टेट लैब भेजा गया है। लैब रिपोर्ट कब तक आएगी इसे लेकर विभागीय अधिकारी कुछ भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं। बीते साल अक्टूबर में लिए गए 12 सैंपलों में जो एक सैंपल फेल आया था, उसकी अब तक फाइनल रिपोर्ट भी विभागीय अधिकारियों के हाथ नहीं लगी है। जबकि, सैंपल लिए पांच माह से अधिक वक्त हो चला है। सैंपल की रिपोर्ट में देरी और लंबी विभागीय प्रक्रिया के चलते ही मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी कपिलदेव के अनुसार बीते साल अक्टूबर में 12 सैंपल जांच के लिए स्टेट लैब भेजे गए थे। करीब एक माह बाद नवंबर में रिपोर्ट आई, जिसमें कनखल स्थित एक प्रतिष्ठान से लिए कुट्टू के आटे का सैंपल फेल आया था। संबंधित कारोबारी की ओर से सैंपल दोबारा जांच के लिए रेफरल लैब कोलकाता भिजवाया गया है, जिसकी रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं आई है इसका पता लगाया जा रहा है।