– राकेश अचल हम जैसे रोजाना लिखने वाले लेखकों के लिए मुश्किल ये है कि हमें देश में राजनीति के अलावा कुछ भी नया नहीं होता दिखाई देता । नया होता भी होगा तो आज की राजनीति का चेहरा इतना बड़ा है कि वो सबको अपने मायामंडल से छिपा लेतीContinue Reading

स्वदेशी के महत्व को बताता है छत्रपति का जीवन– लोकेन्द्र सिंह छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म शिवनेरी दुर्ग में फाल्गुन मास (अमावस्यांत) कृष्ण पक्ष तृतीया को संवत्सर 1551 में हुआ। ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह दिनांक 19 फरवरी, 1630 होती है। चूँकि छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन ‘स्व’ की स्थापना कोContinue Reading

– राकेश अचल सोनम वांगचुक पिछले एक पखवाड़े से लद्दाख की खून जमा देने वाली सर्दी में अनशन पर हैं ,लेकिन दुर्भाग्य कि लद्दाख के बाहर किसी को न सोनम दिखाई दे रहे हैं और न सुनाई दे रहे है। सवाल ये है कि सोनम वांगचुक को क्या चाहिए ?Continue Reading

– नयन कुमार राठी आज होली है सभी ओर चहल -पहल है, बड़े लोगों से छोटे बच्चों तक में उत्साह और उमंग है। छोटे बच्चे छोटी पिचकारी में रंग भरकर एक-दूसरे पर डालकर खुश हो रहे हैं।  होली के गीत गाकर  एक दूसरे का दिल बहला रहे हैं। पर इनContinue Reading

– राकेश अचल मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को कांग्रेस हाई कमान ने अंततोगत्वा 18  वीं लोकसभा के लिए होने वाले आमचुनाव में राजगढ़ संसदीय सीट से प्रत्याशी घोषित कर ही दिया ।  मुझे नहीं लगता कि ये फैसला दिग्विजय सिंह के मन का होगा,लेकिन वे कांग्रेस के उम्रदराजContinue Reading

– दिनेश चंद्र वर्मा आज जब पत्रकारिता मात्र व्यवसाय में परिवर्तित हो गई है, तब यह प्रश्न भी उठता है कि क्या पत्रकारों का काम लिखना मात्र ही है? इस प्रश्न का उत्तर दुनिया के अन्य देशों के पास हो ना हो, भारत की पत्रकारिता के पास अवश्य है। भारतContinue Reading

– विवेक रंजन श्रीवास्तव हमारे मनीषियों द्वारा समय समय पर पर्व और त्यौहार मनाने का प्रचलन ऋतुओं के अनुरूप मानव मन को बहुत समझ बूझ कर निर्धारित किया गया है। जब ठंड समाप्त होने लगती है, गेंहूं चने की नई फसल आने को होती है, मौसम में आम की बौरContinue Reading

-राजेंद्र सिंह गहलोत वर्तमान में भले ही किन्हीं कारणों से कुछ मुस्लिमों को होली खेलने और रंग से परहेज हो पर सदा से ऐसा न था। लगभग सभी मुगल शासकों के दरबारों में होली का जश्न मनाया जाता था। मिर्जा कतील ने 1800 ई.के आसपास लिखी अपनी फारसी कृति ‘हफ्ताContinue Reading

    – उमेश कुमार साहू ऋतुराज बसंत के आगमन के साथ ही प्रकृति का सुंदर स्वरूप निखर उठता है। पतझड़ के पश्चात पेड़ पौधे नई-नई कोंपलों, फूलों से आच्छादित हो जाते हैं। धरती सरसों के फूलों की बासंती चादर ओढ़कर श्रृंगार करती है। विभिन्न प्रकार के पुष्पों की मनमोहकContinue Reading

-सरफराज खान जब फूलों का नाम आता है तो गुलाब का नाम सबसे पहले आता है। हम अपने प्रियजनों को उपहार में गुलाब के फूलों का गुलदस्ता पेश करते हैं। कई प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए गुलाब कहीं से भी लाने को तत्पर रहते हैं। यहां तक कि वे किसीContinue Reading