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गुरुकुल कााँगड़ी विश्वविद्यालय के भेषज विज्ञान विभाग में 14 जनिरी 2021 से वनरंतर चल रहे औषधीय
पादप

महाकुम्भ का आज विवधित समापन हो गया । इस अिसर पर बृहद समापन समारोह का आयोजन
वकया गया, वजसमेदेश विदेश के विवभन्न विद्वानों नेअपने विचार ब्यक्त वकयेI काययक्रम में मुख्य िक्ता
के रूप में एवमटी विश्वविद्यालय नॉएडा के प्रो० रविन्द्र कु मार रैना ने कोविड-19 एिं इसके उपरान्त हबयल
क्षेत्र में संभािनाएं विषय पर एक ब्याख्यान वदया I उन्ोंनेकहा वक भारतीय समाज मेंप्राचीन काल से
रोजमराय के कामों में विवभन्न औषधीय िस्तुओं का उपयोग वकया जाता रहा है उन्ोंने कहा वक भारतीय
रसोई एक फामेसी का काम करता है वजसमे तमाम जड़ी बूवटयों का उपयोग मसालों के रूप में वकया
जाता है, जो भोजन सुपाच्य बनाने के साथ साथ हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक होते हैं I
प्रो० रैना ने कहा वक इस समय देश में के िल लगभग 35 प्रवतशत कच्ची औषवधयां ही उगाई जा
रही है, शेष 75 % कच्ची औषवध के वलए हम आयात एिं िनौषवधयों पर वनभयर हैं, क्ूंवक िन औषवधयां
उत्पादन एिं प्राप्ति वक दृवि सेगुणित्ता परक नहीं होती इसवलए उनसे वनवमयत दिा भी इप्तित गुणों िाली
नहीं हो पाती I उन्ोंनेजोर देकर युिाओं से आह्वान वकया वक भारत हबयल दिा उत्पादन के क्षेत्र में एक
तेजी से उभरता हुिा बाजार है वजसे कोविड-19 के पश्चात बहुत मान्यता एिं विश्वश्ता हावसल हुयी है,
इसवलए विवभन्न जड़ी बूवटयों एिं औषधीय पादपों का िैज्ञावनक कृ वषकरण वकया जाना चावहए, वजस से
इस क्षेत्र वक जरूरत को पूरा कर युिा इसमें रोजगार सृजन एिं जीविकोपाजयन हावसल कर सकते हैं I
काययक्रम के मुख्य अवतवथ गेल इंवडया के तकनीकी सदस्य डा० आशुतोष कनायटक ने कहा वक
ितयमान समय में जनमानस तमाम तरह की ब्यावधयोंसे ग्रवसत हो रहा है, वजसके वनिारणाथय आयुिेवदक
औषवधयों का उपयोग इस तरह से वकया जाना चावहए वक ब्यप्तक्त रोग ग्रस्त हो ही नहीं I उन्ोंनेकहा वक
ितयमान समय में आयुिेद के उत्पादों को मल्टी लेिल माके वटंग सेभी विश्व भर में विपणन वकया जाना
चावहए I
काययक्रम के संरक्षक विश्वविद्यालय के यशश्वी कु लपवत प्रो० रूप वकशोर शास्त्री जी ने भी अपने
विचार ब्यक्त वकये I उन्ोंनेकहा वक कोरोना संक्रमण के कारण हररद्वार में आयोवजत होने िाले महाकु म्भ
को के िल सांके वतक रूप में आयोजन वकया गया वजसकी पूवतय भेषज विज्ञान विभाग द्वारा आयोवजत
औषधीय पादप महाकु म्भ नेकाफी हद तक पूरा वकया, इस औषधीय पादप कु म्भ में औषधीय महत्व एिं
अन्य उपयोगी काययक्रम आयोजन वकये गए I उन्ोंनेविज्ञान, औषधी, पादप एिंस्वास्थ्य शब्ों का िैवदक
एिं शास्त्रीय वििेचन करतेहुए इनकी िैज्ञावनकता तथा जीिन प्रदत्ता को स्पि वकया I
काययक्रम में अपनेविचार रखते हुए आयुवियज्ञान एिं स्वास्थ्य संकाय के संकायाद्यक्ष प्रो० आर०
सी० दुबे जी ने िेदों मेंिवणयत औषवधयोंएिं जीिाणुओं विषाणुओंके बारे में विस्तृत से िणयन वकया, उन्ोंने
कहा वक हमारे यहााँ िैवदक काल से ही िीमाररयोंउनके कारण एिं वनदान का िणयन वमलता है और धीरे
धीरे सम्पूणय विश्व िेदों की बातों को मान रहा है I
काययक्रम के इस अिसर पर भेषज विज्ञान विभाग के विभागाद्यक्ष प्रो० सतेन्द्र कु मार राजपूत ने
कहा वक इस औषधीय पादप महाकु म्भ का साढ़े तीन महीने अक सफल आयोजन वकया गया, इस
काययक्रम में देश विदेश के हर क्षेत्र के विद्वानों ने वहस्सा वलया I इस कु म्भ में स्वास्थय एिं इस से सम्बंवधत
सभी क्षेत्रों से सम्बंवधत काययक्रम आयोवजत वकये गए I उन्ोंनेकहा वक इस महाकु म्भ के सफल आयोजन
से सम्पूणय जनमानस ने स्वास्थय एिं औषधीय िनस्पवतयों तथा जड़ी बूवटयोंके बारे में न वसफय ज्ञान अवजयत
वकया बप्ति वकस तरह से ितयमान कोरोना जैसी घातक विमाररयो से अपने आप को सुरवक्षत कर सकेंI