पांच साल में सामने आएंगे नई शिक्षा नीति के व्यापक परिणाम-डा.निशंक

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5 वर्ष के भीतर सुप्रीम कोर्ट में हिंदी में बहस होने लगेगी

हरिद्वार। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा की नई शिक्षा नीति के ठोस परिणाम अगले 5 साल के भीतर सामने आने लगेंगे। उन्होंने कहा की नई शिक्षा नीति भारतीय भाषाओं को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देगी और उन्हें पूरी उम्मीद है कि अगले 5 वर्ष के भीतर सुप्रीम कोर्ट में हिंदी में बहस होने लगेगी। चमन लाल महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं भविष्य का भारत विषय पर आधारित शिक्षा संवाद कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि भारत में उस समय नालंदा, तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय थ।े जब दुनिया में कोई भी ज्ञान का बड़ा केंद्र नहीं था। उस समय भारत स्थापत्य कला, आयुर्वेद एवं योग के क्षेत्र में चरम पर था। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2 भारत को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाएगी। कुछ सालों के भीतर ही नई शिक्षा नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगेंगे। कुछ ही वर्षों के भीतर भारत रिसर्च के क्षेत्र में अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ने की स्थिति में होगा। डा.निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा और रिसर्च इन सभी पर समान रूप से फोकस करती है। इस नीति का उद्देश्य केवल शिक्षित पीढ़ी का निर्माण करना ही नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो आगामी दशकों में भारत का हर क्षेत्र में नेतृत्व कर सके। उन्होंने भारतीय भाषाओं के विकास पर विशेष जोर देते हुए कहा कि हिंदी और भारतीय भाषाओं का आपस में कोई विरोध नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले 5 सालों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में हिंदी में भी बहस होने लगेगी। उन्होंने इसके लिए शिक्षा मंत्री रहते हुए व्यक्तिगत स्तर पर भी प्रयास किए हैं। डा.निशंक ने कहा कि अंग्रेजी देश की 22 भारतीय भाषाओं में शामिल नहीं है। इसे केवल माध्यम भाषा के रूप में स्वीकार किया गया था। आने वाले समय में इसकी आवश्यकता लगातार घटती जायेगी। उन्होंने कहा की नई शिक्षा नीति ऐसा दस्तावेज है। जिस पर दुनिया का सबसे लंबा विमर्श चला। इस नीति पर वर्तमान में अमेरिका,इंग्लैंड,ऑस्ट्रेलिया,ओमान तथा दुनिया के अन्य कई विश्वविद्यालयों में शोध कार्य किए जा रहे हैं।इस अवसर पर डा.निशंक ने शिक्षकों, छात्र-छात्राओं के साथ संवाद भी किया तथा उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए। उन्होंने महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका चमन संदेश के नई शिक्षा नीति विशेषांक का विमोचन भी किया। महाविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष पंडित ईश्वरचंद्र शर्मा ने सभी प्रकार की बौद्धिक एवं शैक्षिक गतिविधियों के साथ युवा वर्ग को और व्यापक स्तर पर जोड़े जाने पर जोर दिया। प्रबंध समिति के अध्यक्ष राम कुमार शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति पर यह संवाद छात्र-छात्राओं के हित में अहम भूमिका निभाएगा और उनमें नई शिक्षा नीति के विषय में समझ का स्तर बढ़ेगा। महाविद्यालय के प्राचार्य डा.सुशील उपाध्याय ने कहा कि नहीं शिक्षा नीति दुनिया की सबसे श्रेष्ठ नीतियों में से एक है। लेकिन असली चुनौती यह है कि इस नीति का किस ढंग से क्रियान्वयन किया जाता है। क्रियान्वयन के आधार पर ही इसके सुखद परिणाम प्राप्त हो सकेंगे। महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव अरुण हरित एवं कोषाध्यक्ष अतुल हरित ने डा.निशंक एवं हिमालयी विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रोफेसर राजेश नैथानी को सम्मानित किया। कार्यक्रम का समन्वय डा.मीरा चौरसिया और संचालन डा.तरुण गुप्ता ने किया। इस मौके पर पूर्व राज्य मंत्री शोभाराम प्रजापति, डा.मधु,डा.सुप्रिया रतूड़ी, गौरव कौशिक,लक्सर के नगर पालिकाध्यक्ष अमरीश गर्ग,भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज नायक ,रजत गौतम,असगर अली प्रधान तथा महाविद्यालय के समस्त शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।