कवि हृदय शान्ति पुरूष अटलजी
-डा. बद्रीनारायण तिवारी ”भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता-जागता राष्ट्र पुरुष है, हिमालय इसका मस्तक है, गौरी शंकर शिखा है। किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे है। विन्ध्याचल कटि है, नर्मदा करधनी है। पूर्वी और पश्चिमी घाट, दो विशाल जंघाएं हैं। कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पगContinue Reading











