हरिद्वार, 4 अक्टूबर: इंकलाबी मजदूर केन्द्र (IMK) का सातवाँ केंद्रीय सम्मेलन हरिद्वार के राजमहल बैंकेट हॉल (ज्वालापुर) में शुरू हुआ। निवर्तमान अध्यक्ष खीमानन्द ने झंडारोहण कर सम्मेलन की शुरुआत की, जिसके बाद संघर्ष में शहीद हुए मजदूरों और मेहनतकशों को श्रद्धांजलि दी गई।
अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य:
- सम्मेलन में पेश राजनीतिक रिपोर्ट के अनुसार, 2007-08 का वैश्विक आर्थिक संकट जारी है, जिससे उबरने के लिए पूंजीवादी-साम्राज्यवादी शासक निजीकरण की जन-विरोधी नीतियों को तेज़ी से बढ़ा रहे हैं।
- बेरोज़गारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और अपराध जैसी समस्याएँ लगातार बढ़ रही हैं।
- दुनिया भर में दक्षिणपंथी और धुर-दक्षिणपंथी संगठनों का उभार तेज़ी से हो रहा है।
- इज़रायली शासकों द्वारा अमेरिकी साम्राज्यवादियों की शह पर फिलिस्तीन में भयंकर बमबारी और ज़मीनी कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई, जिसमें गाजा पट्टी तबाह हुई और 65 हज़ार से अधिक फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए।
- रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिकी साम्राज्यवादियों की खतरनाक भूमिका और अंतर-साम्राज्यवादी टकराव में चीन से मिल रही चुनौती पर भी चर्चा हुई।
- कहा गया कि आज लगभग 147 देशों में शासक वर्ग के खिलाफ बगावत जैसे हालात हैं, जिसमें श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल के उदाहरण दिए गए।
राष्ट्रीय परिदृश्य:
- सम्मेलन में हिन्दू फासीवादी मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना की गई। यह कहा गया कि सरकार ने पिछले तीन वर्षों में निजीकरण-उदारीकरण-वैश्वीकरण की नीतियों को तेज़ी से लागू किया है, जिससे बेरोज़गारी, महंगाई और भ्रष्टाचार बढ़ा है।
- सरकार पर अडानी-अंबानी जैसे कॉर्पोरेट घरानों को सरकारी उद्योग, किसानों की ज़मीनें और प्राकृतिक संसाधन लुटाने का आरोप लगाया गया।
- मजदूर विरोधी चार लेबर कोड को देश के मजदूरों को गुलामी की ओर धकेलने वाला बताया गया।
- सांप्रदायिक नफ़रत फैलाने और मुसलमानों को निशाना बनाने की निंदा की गई, जिसमें गौ हत्या और लव जिहाद के नाम पर मॉब लिंचिंग का ज़िक्र किया गया।
- ईडी, सीबीआई जैसी संस्थाओं का राजनीतिक विरोधियों के दमन के लिए उपयोग करने की आलोचना की गई।
- यह भी बताया गया कि गत तीन वर्षों में देश के कोने-कोने से मजदूरों, किसानों, छात्रों और नौजवानों ने सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाई है, जिसमें बेरोज़गारी और पेपर लीक के खिलाफ हुए बड़े प्रदर्शन शामिल हैं।
चर्चा से यह निष्कर्ष निकला कि आज पूरी दुनिया में फासीवादी सत्ताएँ पूंजीपति वर्ग के मुनाफ़े के लिए काम कर रही हैं और जनता को बांटने के लिए आतंकवाद, नस्ल और धर्म का इस्तेमाल कर रही हैं। इंकलाबी मजदूर केन्द्र के सातवें सम्मेलन ने देशी-विदेशी पूंजीपति वर्ग और उनकी फासीवादी सरकारों के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया और देश की मजदूर-मेहनतकश आबादी को संगठित कर इस लड़ाई को तेज़ करने का आह्वान किया।












