हरिद्वार:
तीर्थ नगरी हरिद्वार में मंगलवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) विभाग की एक विशेष टीम ने रेलवे स्टेशन के ठीक सामने स्थित प्रसिद्ध ‘होटल अशोका’ पर अचानक kiछापेमारी की। यह होटल पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष/पूर्व मेयर अनीता शर्मा और उनके पति व पूर्व नगर पालिका सदस्य अशोक शर्मा का है। जीएसटी अधिकारियों की इस औचक कार्रवाई से होटल परिसर और आसपास के व्यावसायिक क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों की हो रही खंगाली
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार दोपहर जीएसटी विभाग की टीम गाड़ियों के काफिले के साथ होटल अशोका पहुंची। होटल में प्रवेश करते ही अधिकारियों ने मुख्य लेखा अनुभाग (अकाउंट्स सेक्शन) को अपने नियंत्रण में ले लिया और वित्तीय लेनदेन से जुड़े अभिलेखों की जांच शुरू कर दी। टीम होटल के पिछले कुछ वर्षों के बिलिंग रजिस्टर, जीएसटी रिटर्न दाखिल करने से संबंधित कागजात और अन्य वित्तीय दस्तावेजों को बारीकी से खंगाल रही है।
अधिकारियों द्वारा होटल प्रबंधन से कई सवाल-जवाब किए जा रहे हैं तथा आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है। समाचार लिखे जाने तक जीएसटी विभाग की कार्रवाई लगातार जारी थी।
कार्रवाई पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी वजह
जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने फिलहाल इस कार्रवाई के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। जांच टीम का कहना है कि यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि वित्तीय गड़बड़ी या कर चोरी का क्या मामला है। विभागीय स्तर पर जांच के तथ्य जुटाए जाने के बाद ही आधिकारिक ब्रीफिंग की जाएगी।
अशोक शर्मा का आरोप: “सरकार के इशारे पर हो रही दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई”
दूसरी ओर, इस पूरी कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व नगर पालिका सदस्य अशोक शर्मा ने इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “हम अपना समस्त व्यवसाय पूरी ईमानदारी और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत करते हैं। मैं पिछले कुछ समय से लगातार सरकार की नीतियों, जनविरोधी फैसलों और कमियों को जनता के सामने उजागर कर रहा हूं। इसी वजह से मुझे और मेरे परिवार को राजनीतिक दुर्भावना के तहत निशाना बनाया जा रहा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से सरकार के इशारे पर उन्हें दबाने और उनकी आवाज बंद करने के लिए की जा रही है।
फिलहाल, इस छापेमारी के बाद स्थानीय राजनीतिक और व्यापारिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है और सभी की नजरें जीएसटी विभाग की आगामी रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।










