हनुमान जी की पूजा और महिलाएं

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  • हनुमान की पूजा-अर्चना और व्रत में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए अर्थात संयमपूर्वक रहना चाहिए।
  • पूजा में चरणामृत का उपयोग न करें। शास्त्रों में इसका विधान नहीं है।
  • जो प्रसाद हनुमान को चढ़ाया जाए, वह शुद्ध होना चाहिए।
  • दीपक और प्रसाद में शुद्ध घी का ही प्रयोग करें।
    बजरंग बाण
    हनुमान शक्ति व साहस के प्रतीक हैं। जब मनुष्य दुश्मनों से घिरा हुआ हो और चारों तरफ से निराश हो चुका होतो उसे गोस्वामी तुलसीदास रचित बजरंग बाण पूरी श्रद्धा व पवित्र मन से पढऩा चाहिए। इसके पढऩे से शरीर में हनुमानजी की शक्तियो का विकास होने लगता है और मन की संकल्प शक्ति में बढ़ोतरी होती है। इसके पढऩे से मनुष्य निर्भीक हो जाता है। तांत्रिक मांत्रिक क्षेत्रों में भी बजरंग बाण का विशेष महत्व है। शारीरिक व्याधि, घर में भूत-प्रेत आपदा की बाधाएं मानसिक परेशानियां आदि के निवारण के लिए बजरंग बाण रामबाण की तरह है। जहां इसका नियमित पाठ होता है उस घर में कभी दैवी आपदा बाधा नहीं आती। साधक को चाहिए कि वह अपने सामने हनुमानजी का चित्र और यदि हनुमान यंत्र मिल सके तो उसे भी या चित्र या मूर्ति रख लें और पूरी भावना तथा आत्मविश्वास के साथ उनका मानसिक ध्यान करे। वह यह विचार करे कि हनुमान जी की दिव्य और बलवान शक्तियां मेरे मन व शरीर में प्रवेश कर रही हैं। यह शक्ति मेरी मन की शक्ति को बढ़ाने में सहायक बने। धीरे धीरे इस प्रकार अभ्यास करने से उपासक के मन का शक्ति द्वार खुलने लगता है और एकाग्रता पर नियंत्रण होने लगता है। जब ऐसा अनुभव हो तो समझना चाहिए बजरंग बाण सिद्ध हो गया। हनुमान जी की पूजा में इत्र सुगंधित द्रव्य तथा गुलाब के फूलों का प्रयोग नहीं किया जाता। उपासक स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण कर बैठे यदि लाल लंगोट पहने हो तो सर्वोत्तम माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार महिलाओं को बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए परंतु वह हनुमानजी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक तथा अगरबत्ती जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ कर सकती हैं।
    हनुमान साधना में हनुमानजी की मूर्ति या चित्र के सामने तेल का दीपक जलाना चाहिए और उन्हें गुड़ मिश्रित चने का भोग लगाना चाहिए। उपासना करनेवाला अपना आसन ऊनी वस्त्र का ही बिछाए और मन में हनुमानजी का ध्यान करें। धीरे धीरे उपासक स्वयं महसूस करेगा कि उसके शरीर में एक नई चेतना, एक नया जोश और नई शक्ति का प्रवेश हो रहा है।
    बच्चों की नजर उतारने, शांत और गहन निद्रा के लिए रात्रि को अकेले यात्रा करते समय भूत बाधा दूर करने तथा अकारण भय को दूर करने के लिए बजरंग बाण आश्चर्यजनक सफलता देता है। किसी भी महत्पूर्ण कार्य पर जाने से पूर्व भी यदि इसका पाठ किया जाये तो उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।
    हनुमान की पूजा पद्धति
  • हनुमान की प्रतिमा पर तेल एवं सिंदूर चढ़ाया जाता है। उन्हें फूल भी पुरुषवाचक जैसे गुलाब, गेंदा आदि चढ़ाना चाहिए। सुंदरकांड या रामायण के पाठ से वे प्रसन्न होते हैं। प्रसाद के रूप में चना, गुड़, केला, अमरूद, या लड्डू चढ़ाया जाता है।
  • हनुमान को लाल फूल प्रिय हैं। अत: पूजा में लाल फूल ही चढ़ाएं।
  • मूर्ति को जल व पंचामृत से स्नान कराने के बाद सिंदूर में तेल मिलाकर उनको लगाना चाहिए। इससे वे प्रसन्न होते हैं।
  • साधना हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुंह करके ही शुरू करना चाहिए।
    हनुमान की पूजा-आराधना के विशेष दिन
    मंगलवार और शनिवार को हनुमान की पूजा का महत्व है। ऐसा कहते हैं उनका जन्म मंगलवार के दिन हुआ था। शनिदेव को उन्होंने युद्ध में हराया था। शनि ने इनको आशीर्वाद दिया था कि जो व्यक्ति शनिवार के दिन हनुमान की पूजा करेगा उसे शनि का कष्ट नहीं होगा।
    हनुमान चालीसा-पाठ
    भक्तों को 108 बार गोस्वामी तुलसीदास कृत हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। पाठ शुरू करने के पहले रामरक्षास्तोत्रम् का पाठ अवश्य करना चाहिए। अगर एक बैठक में 108 बार चालीसा-पाठ न हो सके तो इसे दो बार में पूरा कर सकते हैं। (विफी)