हरिद्वार जमीन घोटाले में धामी सरकार का कड़ा रुख: 12 अधिकारी सस्पेंड, विजिलेंस जांच शुरू

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हरिद्वार में 54 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में धामी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है । हरिद्वार के जिलाधिकारी (डीएम) कर्मेन्द्र सिंह, पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी, और एसडीएम अजयवीर सिंह सहित कुल 12 लोगों को निलंबित कर दिया गया है। इस घोटाले की जांच अब विजिलेंस विभाग को सौंप दी गई है।

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देहरादून, 3 जून, 2025 – उत्तराखंड में एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत धामी सरकार ने हरिद्वार में हुए बहुचर्चित 54 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में लिप्त पाए गए 12 अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिराई है. इस मामले में हरिद्वार के मौजूदा जिलाधिकारी (डीएम) कर्मेन्द्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी को भी निलंबित किया गया है, जो राज्य में दूसरा ऐसा मामला है जब किसी सेवारत जिलाधिकारी को पद पर रहते हुए निलंबित किया गया हो। इस पूरी जांच को अब उत्तराखंड के विजिलेंस विभाग को सौंप दिया गया है।
घोटाले का विवरण
यह मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा कूड़े के ढेर के पास स्थित अनुपयुक्त और सस्ती कृषि भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदने से जुड़ा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिस जमीन का भुगतान 54 करोड़ रुपये में किया गया, उसकी वास्तविक कीमत मात्र 11 से 15 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है। जांच में पाया गया है कि इस भूमि की न तो वास्तविक आवश्यकता थी और न ही खरीद के लिए किसी भी प्रकार की पारदर्शी बोली प्रक्रिया का पालन किया गया। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर यह संदेहास्पद सौदा किया गया, जिसमें कम दाम की जमीन को अत्यधिक कीमत पर खरीदा गया।
निलंबित किए गए प्रमुख अधिकारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाई और रिपोर्ट मिलते ही तुरंत कार्रवाई की। जिन प्रमुख अधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनमें शामिल हैं :
* कर्मेन्द्र सिंह, जिलाधिकारी (डीएम), हरिद्वार: भूमि क्रय की अनुमति देने और प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने में उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई
* वरुण चौधरी, पूर्व नगर आयुक्त, हरिद्वार : इन्होंने बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए भूमि क्रय प्रस्ताव को पारित किया और वित्तीय अनियमितताओं में इनकी प्रमुख भूमिका सामने आई है।
* अजयवीर सिंह, एसडीएम : जमीन के निरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया में घोर लापरवाही बरतने और शासन तक गलत रिपोर्ट पहुंचाने के लिए इन्हें निलंबित किया गया है।
इन तीनों अधिकारियों को उनके वर्तमान पदों से हटा दिया गया है और इनके खिलाफ विभागीय और दंडात्मक कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
अन्य निलंबित कर्मचारी:
उपरोक्त अधिकारियों के अलावा, जमीन घोटाले में संदिग्ध पाए जाने पर कई अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है :
* निकिता बिष्ट: वरिष्ठ वित्त अधिकारी, नगर निगम हरिद्वार
* विक्की: वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक
* राजेश कुमार: रजिस्ट्रार कानूनगो
* कमलदास: मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तहसील हरिद्वार

इससे पहले, जांच अधिकारी नामित होने के बाद नगर निगम के प्रभारी सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण, कर एवं राजस्व अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट और अवर अभियंता दिनेश चंद्र कांडपाल को भी प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, संपत्ति लिपिक वेदवाल का सेवा विस्तार भी समाप्त कर दिया गया, जिन्हें सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार दिया गया था। उनके खिलाफ सिविल सर्विसेज रेगुलेशन के अनुच्छेद 351(ए) के प्रावधानों के तहत अनुशासनिक कार्रवाई के लिए नगर आयुक्त को निर्देश दिए गए हैं।
अब इस पूरे 54 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले की गहन जांच विजिलेंस विभाग द्वारा की जाएगी, ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके ।