कुंभ 2027 भव्य आयोजन के लिए तैयारियां तेज, साधु-संतों में उत्साह
महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रविन्द्र पुरी ने सरकार की तैयारियां को सराहा
हरिद्वार: हरिद्वार में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ मेले के दिव्य एवं भव्य आयोजन के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप सभी आवश्यक तैयारियां तेजी से जारी हैं। कुंभ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आधारभूत सुविधाओं का विकास एवं विस्तार किया जा रहा है। साथ ही कुंभ के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं,अखाड़ों तथा साधु-संतों के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर धर्मनगरी हरिद्वार के साधु-संतों एवं अखाड़ों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।इसके साथ ही अखाड़ों के स्तर पर भी कुंभ मेले को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी गई हैं।श्रीपंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्री महंत रविन्द्र पुरी ने राज्य सरकार द्वारा कुंभ मेले को लेकर की जा रही तैयारियों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का धन्यवाद ज्ञापित किया है।उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए जा रहे महत्वपूर्ण सहयोग की भी प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।श्री महंत रविन्द्र पुरी ने कहा कि सभी अखाड़े धार्मिक परंपरा के अनुसार कुंभ मेले में भाग लेंगे।उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेले में अखाड़ों द्वारा पूरे विधि-विधान से धर्मध्वजाओं की स्थापना कर अपनी छावनियां स्थापित की जाएंगी।अखाड़ों द्वारा परंपरानुसार पेशवाई एवं अमृत स्नान में सहभागिता की जाएगी।उन्होंने कहा कि कुंभ मेले के आयोजन के लिए सभी अखाड़ों तथा श्रीगंगा सभा की सहमति से स्नान पर्वों एवं अमृत स्नान (शाही स्नान) की तिथियों की घोषणा के साथ ही धर्मनगरी सहित कुंभ क्षेत्र में शामिल सभी स्थानों पर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई थीं।उन्होंने यह भी कहा कि कुंभ मेले की व्यवस्थाओं के लिए बड़े पैमाने पर किए जा रहे आधारभूत कार्यों से न केवल मेले के दौरान,बल्कि लंबे समय तक धर्मनगरी हरिद्वार सहित समूचे कुंभ क्षेत्र को लाभ मिलेगा।इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था,तीर्थाटन और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रतिबद्ध प्रयासों से कुंभ मेले का दिव्य एवं भव्य आयोजन सुनिश्चित है,जिसके लिए सभी अखाड़ों के स्तर पर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2021 में आयोजित कुंभ मेले में कोविड के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन संभव नहीं हो सका था।वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेले को लेकर साधु-संतों के साथ-साथ श्रद्धालुओं में भी काफी उत्साह देखा जा रहा है ।निश्चित रूप से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मेले में प्रतिभाग करेंगे,जिनके लिए राज्य सरकार द्वारा समय पर समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान के नेतृत्व में चलाया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान
हरिद्वार।पंतद्वीप घाट एवं आसपास के क्षेत्रों में अतिक्रमण के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए लगभग 100से अधिक झोपड़ियों/खोखो को ध्वस्त किया गया।जिला प्रशासन,नगर निगम, पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान।चारधाम यात्रा को सुगम और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है अतिक्रमण हटाओ अभियान।चारधाम यात्रा को सुगम और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने शहर में अतिक्रमण के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान के नेतृत्व में गुरुवार को नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने पंतद्वीप घाट एवं आसपास के क्षेत्रों में अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए घाट एवं घाट के आस पास के क्षेत्रों में अवैध रूप से लगाए गई लगभग 100 से अधिक झोपड़ियों एवं खोखो को ध्वस्त किया गया। प्रशासन की टीम ने स्पष्ट चेतावनी दी कि भविष्य में इन स्थानों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोबारा अतिक्रमण करने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान ने बताया कि चारधाम यात्रा के दौरान हरिद्वार में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।ऐसे में सड़क,फुटपाथ,पैदल मार्ग और गंगा घाटों पर अतिक्रमण होने से आवागमन बाधित होता है और श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।इसी को ध्यान में रखते हुए यह अभियान चलाया गया है।उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।इसके लिए प्रशासन लगातार संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बनाए हुए है और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।अभियान के दौरान अधिकारियों ने स्थानीय लोगों और दुकानदारों से नियमों का पालन करने और शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने में सहयोग की अपील भी की।टीम में उप नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी, हरकी पौड़ी चौकी प्रभारी संजीत कंडारी,रोड़ी बेलवाला चौकी प्रभारी नवीन चौहान,मुख्य सफाई निरीक्षक संजय शर्मा,सफाई निरीक्षक धीरेंद्र सेमवाल समेत संबंधित अधिकारी और भारी पुलिस बल मौजूद रहा
जिलाधिकारी ने अधिकारियों एवं कार्मिकों को जनगणना कार्य हेतु सूची उपलब्ध कराने के दिए निर्देश
हरिद्वार। जनपद में जनगणना का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए जिलाधिकारी/ प्रमुख जनगणना अधिकारी ने जनपद के समस्त कार्यालयाध्यक्षों को अधिकारियों एवं कार्मिकों की सूची तत्काल उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिए गेट है।उन्होंने अवगत कराया है कि जनगणना 2027 के प्रथम चरण (मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना) का कार्य उत्तराखंड राज्य में 25अप्रैल से 24मई तक तथा द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना) 09 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक संचालित किया जायेगा। उन्होंने निर्देश दिए है कि जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं समयबद्ध कार्य है,जिसे निर्धारित अवधि में पूर्ण किया जाना अनिवार्य है।यह कार्य क्षेत्र में पर्यवेक्षक एवं प्रगणकों के माध्यम से घर-घर जाकर संपादित किया जाता है,जिसके लिए पर्याप्त कार्मिकों की आवश्यकता होती है।संज्ञान में आया है कि जनपद के कुछ विभागों/कार्यालयों द्वारा जनगणना कार्य हेतु अपेक्षित कार्मिकों की सूची चार्ज अधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराई जा रही है,जिससे पर्यवेक्षक एवं प्रगणकों की नियुक्ति एवं उनके प्रशिक्षण में विलम्ब हो रहा है।उल्लेखनीय है कि इन कार्मिकों का प्रशिक्षण 10अप्रैल 2026 से प्रस्तावित है।जनगणना कार्य के लिए शासन द्वारा जनपद के समस्त तहसीलदार,अधिशासी अधिकारी (नगर पालिका/नगर पंचायत) एवं सहायक नगर आयुक्त (नगर निगम) को चार्ज जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया है,जो अपने-अपने क्षेत्र में पर्यवेक्षक एवं प्रगणकों की नियुक्ति की कार्यवाही कर रहे हैं। जनपद के सभी विभागों से अपेक्षा की जाती है कि वे जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में पूर्ण सहयोग सुनिश्चित करें।
हरिद्वार में इको-सेंसिटिव रिवरफ्रंट डेवलपमेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, जल शक्ति मंत्रालय तथा राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में “इको-सेंसिटिव रिवरफ्रंट डेवलपमेंट”विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ आज हरिद्वार में किया गया।उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के 14रिवर सिटीज एलायंस,देहरादून,हरिद्वार,ऋषिकेश,श्रीनगर,उत्तरकाशी, विकास नगर,मुनि की रेती,काशीपुर,हल्द्वानी,रामनगर,टिहरी गढ़वाल,सेलाकुई, कोटद्वार एवं नैनीताल से संबंधित विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के उप महानिदेशक द्वारा ऑनलाइन माध्यम से सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया गया तथा उत्तराखण्ड में इको-फ्रेंडली रिवरफ्रंट डेवलपमेंट को बढ़ावा देने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए। उन्होंने हरिद्वार में आगामी कुम्भ मेले के दृष्टिगत इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के समयबद्ध आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि कुम्भ जैसे विशाल आयोजन को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार में पर्यावरण अनुकूल रिवरफ्रंट विकास का विशेष महत्व है।राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान से टीम लीड लवलेश शर्मा द्वारा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए अपने-अपने शहरों में रिवरफ्रंट डेवलपमेंट की आवश्यकता पर बल दिया गया।उन्होंने उत्तराखण्ड की विशिष्ट भौगोलिक एवं नदी तंत्र की समृद्धि का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य में 2000 से अधिक नामित नदियाँ हैं,जिससे यहां इको-सेंसिटिव रिवरफ्रंट डेवलपमेंट का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।राज्य स्वच्छ गंगा मिशन,उत्तराखण्ड के मॉनिटरिंग विशेषज्ञ रोहित जयाड़ा ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन एवं राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान के सहयोग से हरिद्वार में आयोजित कार्यशाला के महत्व पर कहा कि हरिद्वार न केवल सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है,बल्कि यह नदियों के साथ मानव के जीवंत संबंध का प्रतीक भी है।उन्होंने प्रतिभागियों से सक्रिय सहभागिता एवं अपने अनुभव साझा करने का आह्वान किया।प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश से भी प्रतिभाग किया गया,जहां राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा पांवटा साहिब में रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कार्य प्रगतिशील है।कार्यक्रम में राज्य स्वच्छ गंगा मिशन,उत्तराखण्ड से अधिशासी अभियंता श्रीमती मोनिका वर्मा,आरबीएम कंसल्टेंट सिद्धार्थ श्रीवास्तव,राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान से कृति ,श्रेया एवं इशलीन कौर,शहरी विकास निदेशालय से रचना पायल,सत्यदेव आर्य,जिला परियोजना अधिकारी,टिहरी गढ़वाल एवं नैनीताल सहित अन्य अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों द्वारा सहभागिता की गई।यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को इको-सेंसिटिव रिवरफ्रंट डेवलपमेंट के विभिन्न आयामों पर व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान करेगा तथा राज्य में सतत एवं पर्यावरण अनुकूल नदी तट विकास को बढ़ावा देगा।कार्यक्रम का समापन 10अप्रैल को किया जाएगा।












