अर्धकुंभ-2027 की तैयारियों को मिलेगी गति, हरकी पैड़ी पर स्नान के लिए गंगाजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में अर्धकुंभ-2027 की तैयारियों और ऊपरी गंगा नहर के वार्षिक रखरखाव को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, ऊपरी गंगा नहर को 20 और 21 अक्टूबर की मध्यरात्रि से बंद कर 7 और 8 नवंबर 2026 की मध्यरात्रि तक बंद रखा जाएगा। इस दौरान नहर की सफाई, मरम्मत, पुनर्स्थापना और सुदृढ़ीकरण से जुड़े कार्य किए जाएंगे। नहर में पानी का प्रवाह रुकने से गंगनहर के किनारे अर्धकुंभ के लिए प्रस्तावित घाटों के निर्माण कार्यों को भी गति मिलने की उम्मीद है। <Cite refs={[“turn913994search4″,”turn913994search8”]}/>
नहर की सफाई और मरम्मत पर रहेगा जोर
ऊपरी गंगा नहर की वार्षिक बंदी के दौरान नहर में जमा गाद, सिल्ट और अन्य अवांछित सामग्री को हटाने के साथ आवश्यक मरम्मत कार्य किए जाएंगे। नहर की दीवारों, संरचनाओं तथा संबंधित तकनीकी व्यवस्थाओं का रखरखाव भी इस अवधि में किया जा सकेगा।
नहर में लगातार पानी बहने के कारण कई स्थानों पर मरम्मत और निर्माण कार्य करना कठिन होता है। ऐसे में पानी का प्रवाह बंद रहने की अवधि संबंधित विभागों के लिए महत्वपूर्ण होगी। इस दौरान लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने और नहर की संरचना को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
अर्धकुंभ-2027 के घाटों के निर्माण को मिलेगा अवसर
हरिद्वार में आगामी अर्धकुंभ-2027 को देखते हुए गंगा और गंगनहर के किनारे घाटों के निर्माण, विस्तार तथा तटों को मजबूत करने से संबंधित कार्य चल रहे हैं। इन कार्यों का उद्देश्य श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए स्नान, आवागमन और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था तैयार करना है।
नहरबंदी के दौरान निर्माण एजेंसियों को ऐसे कार्य करने का अवसर मिलेगा, जिन्हें पानी के तेज बहाव के बीच पूरा करना मुश्किल होता है। निर्धारित समय में निर्माण कार्य पूरे करना मेला प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। इसलिए नहरबंदी की अवधि का अधिकतम उपयोग करने की आवश्यकता होगी। <Cite refs={[“turn913994search5″,”turn913994search8”]}/>
हरकी पैड़ी पर श्रद्धालुओं के स्नान की व्यवस्था
नहर बंद होने की सूचना के बाद हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के मन में गंगास्नान और हरकी पैड़ी पर जल उपलब्धता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उपलब्ध समाचार विवरणों के अनुसार, नहरबंदी के दौरान भी हरकी पैड़ी के प्रमुख घाटों पर स्नान के लिए गंगाजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
हालांकि, श्रद्धालुओं को ध्यान रखना चाहिए कि नहर बंद रहने की अवधि में अलग-अलग घाटों पर पानी की उपलब्धता और प्रवाह की स्थिति समान नहीं हो सकती। गंगास्नान के लिए आने वाले यात्रियों को स्थानीय प्रशासन की सूचनाओं और घाटों पर तैनात कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर की जलापूर्ति पर नजर
ऊपरी गंगा नहर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सिंचाई तथा विभिन्न क्षेत्रों की जलापूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। नहर बंद होने के कारण इससे जुड़े किसानों को सिंचाई की योजना पहले से बनानी पड़ सकती है। खेतों में पानी की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किसानों को संबंधित विभाग से उपलब्ध जानकारी के आधार पर अपनी कृषि गतिविधियां निर्धारित करनी चाहिए।
दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पेयजल आपूर्ति पर भी इस बंदी के संभावित प्रभाव को देखते हुए जल भंडारण तथा वैकल्पिक स्रोतों की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। संबंधित जलापूर्ति एजेंसियों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार उपलब्ध भंडारण और अन्य स्रोतों का प्रबंधन करना होगा। वास्तविक प्रभाव स्थानीय व्यवस्था और जलाशयों में उपलब्ध पानी पर निर्भर करेगा। <Cite refs={[“turn913994search0″,”turn913994search3”]}/>
8 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद जल प्रवाह बहाल करने की तैयारी
नहरबंदी के दौरान सफाई, मरम्मत और निर्माण कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना आवश्यक होगा, ताकि तय कार्यक्रम के अनुसार नहर में पानी दोबारा छोड़ा जा सके। जल प्रवाह बहाल होने से पहले संबंधित व्यवस्थाओं की जांच और आवश्यक तकनीकी कार्य पूरे करना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
कुल मिलाकर, ऊपरी गंगा नहर की यह वार्षिक बंदी हरिद्वार में अर्धकुंभ-2027 की तैयारियों, घाटों के निर्माण और नहर के रखरखाव की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वहीं श्रद्धालुओं के स्नान, किसानों की सिंचाई और संबंधित क्षेत्रों की जलापूर्ति पर इसके प्रभाव को देखते हुए विभागों के बीच बेहतर समन्वय और समयबद्ध व्यवस्था आवश्यक होगी।














