खनन: अवैध खनन पर तत्काल रोक एवं स्टोन क्रेशर पर सीज की कार्रवाई हो :  स्वामी शिवानंद

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जब खनन बंद है तो स्टोन क्रेशर कैसे चल रहे हैं ?

खनन सामग्री से लदे ट्रैक्टर के नीचे आने से दो की मौत व एक गंभीर रूप से घायल

हरिद्वार। मातृ सदन के स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि हरिद्वार में खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है लेकिन स्टोन क्रेशर पर धड़ल्ले से माल पहुंच रहा है ऐसे में यह तय है कि शासन प्रशासन और सरकार की शह पर अवैध खनन पूरी तरह से जारी है। मंगलवार को खनन सामग्री से लदे ट्रैक्टर के नीचे दबकर दो की मौत हो गई है वहीं एक जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। ऐसे में तत्काल अवैध खनन पर रोक लगाने एवं स्टोन क्रेशर को सीज करने की मांग करते हैं। ऐसा नहीं होने पर मातृ सदन आंदोलन करने के लिए विवश होगा।

मातृ सदन आश्रम में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए स्वामी शिवानंद ने कहा कि मंगलवार को सुबह-सुबह खबर आई है कि टांडा भागमल में एक खनन की अवैध ट्रॉली से 3 लोगों की हत्या हो गई है। जिनमें एक स्कूल के मास्टर जी, 5 साल की एक छोटी बच्ची और एक 6 साल का बच्चा शामिल हैं । रोड पर यह तीनों स्कूटी से जा रहे थे, इनमें से दो की स्पॉट पर ही मृत्यु हो गई । बच्ची की हालत अभी क्रिटिकल है । सूचना मिलने पर मातृ सदन के प्रमुख स्वामी शिवानंद महाराज, भारतीय किसान मजदूर उत्थान यूनियन के कुछ किसान नेताओं के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और परिस्थिति का जायजा लिया । वस्तुस्थिति स्पष्ट है कि हाईकोर्ट के आदेश से खनन बंद है । राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के 9 अक्टूबर 2018 के आदेश से खनन और स्टोन क्रशिंग पर पूर्ण पाबंदी लगाई गई है, लेकिन इसका अनुपालन आज तक सुनिश्चित नहीं किया गया है । उल्लंघन को देखते हुए मातृ सदन को हाई कोर्ट जाना पड़ा । जिसके बाद हाईकोर्ट द्वारा खनन पर स्टे लगाया गया । इतना ही नहीं, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के आदेश से स्टोन क्रेशर को भी गंगाजी से 5 किलोमीटर दूर करने का आदेश मौजूद है, लेकिन यह सभी आदेश पड़े रहते हैं और खनन धड़ल्ले से चलता रहता है । इसका दुष्परिणाम यह है कि खनन बंदी के आदेश के बाद भी खनन लगातार हो रहा है । स्वामी शिवानंद ने कहा मंगलवार को जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो देखा कि हर तरफ धड़ल्ले से ट्रैक्टर ट्रॉली खनन का माल ढो रहे हैं । 20-20 फीट गहरे गड्ढे ठीक सड़क के किनारे पड़े हुए हैं । वहां के लोगों ने यह भी बताया कि हाल ही में कम से कम 7 बार दुर्घटना हुई है और कई लोग मरे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन निष्क्रिय है । इसमें यह बता दें कि हाईकोर्ट की भी अपने कर्तव्य के प्रति जागरूकता का अभाव है । इन घटनाओं को लेकर जब भी हाईकोर्ट में केस दर्ज किया जाता है तब हाईकोर्ट इन मामलों को ऐसे लेती है जैसे यह कोई बहुत बड़ी घटना नहीं है, इसलिए दोषी खनन माफिया व अधिकारी बच जाते हैं और यह अवैध धंधा धड़ल्ले से लगातार ऐसेही चलता रहता है । इतना ही नहीं, हरिद्वार में तालाब निर्माण के नाम पर लगातार खनन किया जा रहा है । नदी के किनारे तालाब बनाने के नाम पर 40 फीट गड्ढे खोद दिए गए हैं । सरकार मछली पालन के लिए कमेटी बनाती है । जो वैज्ञानिक स्थल का निरीक्षण करने आए उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि यह गड्ढे इतने गहरे हैं कि इसमें मछली पालन नहीं हो सकता है । इसमें भी जब हाईकोर्ट में केस हुआ तो हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर ही नकेल कसनी शुरू कर दी । सर्वसाधारण के लिए हाईकोर्ट में लड़ाई करना संभव नहीं है । लेकिन सच बहुत बड़ा होता है । हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट अपनी जवाबदेही समझे । माननीय न्यायाधीश श्री राजीव शर्मा जी के आदेश से गंगा और यमुना जी को जीवित इकाई का दर्जा दिया गया जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे कर दिया गया । ऐसे सभी आदेश जो गंगा जी के हित में लिए गए, उन्हें सुप्रीम कोर्ट लगातार स्टे कर सालों से रखा हुआ है । परिणाम यह है कि मर्डर पर मर्डर होते चले जा रहे हैं । आज सुबह भी हमने घटनास्थल पर जाने से पहले वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार को सूचना दी कि वह घटनास्थल पर अपने अधिकारियों को भेजें । हमें सूचना मिली कि डिप्टी एसपी और तहसीलदार मौके पर मौजूद हैं, लेकिन वह हमसे मिलने नहीं आए । सरकार और प्रशासन हाई कोर्ट में शपथ पत्र देते हैं कि खनन नहीं हो रहा है लेकिन आज जब हम मौके पर पहुंचे तो देखा हर तरफ भीषण खनन हो रहा है । हरिद्वार कुंभ नगरी है, तीर्थ नगरी है । यहां सोमवती अमावस्या कांवड़ मेला का आयोजन किया जाता है जिसमें देशभर से करोड़ों लोग सम्मिलित होते हैं । गंगा नदी के किनारे का क्षेत्र ग्रीन बेल्ट है । पास ही में राजाजी नेशनल पार्क है । लेकिन चंद लोगों के मुनाफे के लिए पूरे क्षेत्र को खनन से नष्ट किया जा रहा है । सरकार तत्काल इस अति गंभीर मामले का संज्ञान ले और जवाब दे कि जब खनन बंद है तो स्टोन क्रेशर कैसे चल रहे हैं और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर एक्शन हो । जिलाधिकारी हरिद्वार और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार की जवाबदेही तय हो । कमेटी गठित हो और जांच हो कि गंगाजी को कितना नुकसान हो चुका है और दोषियों से इसकी एक एक पाई वसूली जाए । खनन बंद हो, क्रेशर बंद हो, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के आदेश का अक्षरशः अनुपालन तत्काल सुनिश्चित किया जाए ।