हरिद्वार: उत्तराखंड शासन द्वारा हाल ही में जारी किए गए नए वेतन वृद्धि आदेश ने पेंशनर्स के बीच खलबली मचा दी है। इस आदेश में 11 अप्रैल, 2023 के बाद सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनर्स को ही वेतन वृद्धि देने का प्रावधान किया गया है, जिससे पहले से सेवानिवृत्त पेंशनर्स काफी नाराज हैं।
पेंशनर संगठनों ने जताया विरोध
पेंशनर संगठनों ने इस आदेश को पेंशनर्स के साथ धोखा करार देते हुए कड़ा विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2006 और 2016 के बाद सेवानिवृत्त होने वाले सभी पेंशनर्स को वेतन वृद्धि का लाभ दिया जा रहा है, जबकि उत्तराखंड में ऐसा नहीं किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड राजकीय पेशनर्स समन्वित मंच उत्तराखंड के मुख्य संयोजक जे.पी.चाहर ने इस आदेश की तुलना उत्तर प्रदेश के आदेश से करते हुए कहा कि यह पेंशनर्स के साथ छल है। उन्होंने मांग की है कि सभी सेवानिवृत्त पेंशनर्स को वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाए और एरियर का भुगतान भी किया जाए।
अन्य पेंशनर नेताओं ने भी जताया असंतोष
सेवानिवृत्त उप कोषाधिकारी और मंच के संयोजक अनिरुद्ध शर्मा ने इस आदेश को त्रुटिपूर्ण बताया है। सेवानिवृत्त जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी आर.के.जोशी, सेवानिवृत्त अधिशाषी अभियन्ता एल.सी.पाण्डे और सेवानिवृत्त राज्यकर अधिकारी बी.पी.चौहान ने उत्तराखंड शासन पर पेंशनर विरोधी होने का आरोप लगाया है।
आगे की कार्रवाई
उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड राजकीय पेशनर्स समन्वित मंच उत्तराखंड ने इस मुद्दे पर वर्चुअल बैठक आयोजित की है और निर्णय लिया है कि वे इस आदेश में संशोधन कराने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। मंच ने मांग की है कि सभी सेवानिवृत्तिक देयों में वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाए।
2024-12-31













