हरिद्वार, 31 मार्च 2025: एस.एम.जे.एन. (पी.जी.) कॉलेज, हरिद्वार के राष्ट्रीय सेवा योजना की छात्रा इकाई द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
यह विशेष शिविर बस्तीराम संस्कृत विद्यालय, कनखल में आयोजित किया गया था। शिविर के समापन समारोह की शुरुआत कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुषमा नयाल द्वारा सात दिवसीय प्रगति रिपोर्ट पढ़कर की गई। इस रिपोर्ट में, छात्राओं द्वारा सात दिनों में आयोजित मेहंदी, पोस्टर, वाद-विवाद, रंगोली, प्रश्नोत्तरी, भाषण और अन्य प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली विजेता और उपविजेता छात्राओं के नामों की घोषणा की गई।
शिविर में मुख्य अतिथि कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार बत्रा ने स्वयंसेविकाओं से उनकी प्रतिक्रियाएँ जानीं और शिक्षण संस्थानों में आयोजित होने वाले शिविरों को और अधिक सक्रिय बनाने के लिए अपने विचार साझा किए। अपने संबोधन में, प्रोफेसर बत्रा ने कहा कि आने वाला युग संचार क्रांति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता युवाओं के जीवन का अभिन्न अंग होगी, लेकिन युवा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा और ज्ञान कृत्रिम बुद्धिमत्ता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
ज्ञान प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को मोबाइल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बजाय पुस्तकों और पुस्तकालयों की ओर उन्मुख होना चाहिए। प्रोफेसर बत्रा ने यह भी कहा कि मोबाइल का संतुलित उपयोग करके इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।
विशेष अतिथि के रूप में, रुड़की के एस.एस.डी.पी.सी. कॉलेज से आमंत्रित राजनीति विज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कामना जैन ने स्वयंसेविकाओं का मनोबल बढ़ाया और उन्हें राष्ट्रीय सेवा योजना के उद्देश्यों और लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. कामना जैन ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं को समाज से जोड़ने का काम करती है। राष्ट्रीय सेवा योजना के शिविरों के माध्यम से ही स्वयंसेवक सामाजिक कार्य करने में सक्षम होते हैं।
समापन समारोह में, स्वयंसेवकों ने कविता पाठ किया और अपने अनुभव साझा किए। समापन कार्यक्रम में बस्तीराम संस्कृत विद्यालय की संचालिका श्रीमती हेमा देवी, मनीषा गडतोड़ी, अंजू, विजय लक्ष्मी, कविता और अन्य उपस्थित थे। महाविद्यालय की शिक्षिकाओं में डॉ. सरोज शर्मा, डॉ. पूर्णिया सुंदरियाल, डॉ. लता शर्मा, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. पल्लवी, डॉ. वंदना सिंह, कु. योगेश्वरी आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई। स्वयंसेविकाओं में वैष्णवी कौशिक, पायल मौर्य, तनु पाल, हर्षिता, दीक्षा, अंजलि, कंचन कोतवाल, कीर्ति, पलक, मानसी, शिवानी, ममता, अंजलि और अन्य उपस्थित थीं।
2025-03-31














