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किशोर न्याय समिति द्वारा बालिका सुरक्षा पर कार्यशाला का आयोजन

​देहरादून/भवाली में किशोर न्याय समिति और उत्तराखंड उच्च न्यायालय के तत्वावधान में ‘बालिका सुरक्षा: भारत में उसके लिए एक सुरक्षित और सशक्त वातावरण’ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य बालिकाओं के खिलाफ हिंसा, बाल विवाह और तस्करी को रोकना था। इस अवसर पर ‘जनरल रूल्स (क्रिमिनल)’ और ‘पॉक्सो एक्ट 2012’ पर पुस्तिका का विमोचन किया गया। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गुहानाथन नरेंदर सहित कई न्यायमूर्तियों ने इसमें भाग लिया। न्यायमूर्ति रवींद्र मैथानी ने कहा कि आजादी के इतने साल बाद भी इन विषयों पर चिंतन की जरूरत चिंता का विषय है। किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने पॉक्सो एक्ट और अन्य कानूनों पर चर्चा की। कार्यशाला में चार सत्र आयोजित किए गए, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए।

श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा- नवरात्र मां दुर्गा की आराधना का पर्व

हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि नवरात्र मां दुर्गा की आराधना और शक्ति की उपासना का पर्व है। उन्होंने कहा कि मां भगवती की शक्ति से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। नवरात्र आत्मचिंतन और आंतरिक शुद्धि का अवसर है, जिससे शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि होती है। उन्होंने कहा कि मनसा देवी मंदिर में पेड़ पर धागा बांधने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

पेपर लीक मामले पर युवा कांग्रेस का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

हरिद्वार में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पेपर लीक होने के विरोध में युवा कांग्रेस ने जिलाध्यक्ष कैश खुराना के नेतृत्व में परशुराम चौक पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कैश खुराना ने कहा कि बार-बार पेपर लीक होना सरकार की नाकामी है और ऐसी सरकार को सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार रोजगार देने में पीछे और पेपर लीक में आगे है। उन्होंने सरकार से माफी मांगने और इस्तीफा देने की मांग की।

श्री अखंड परशुराम अखाड़ा का संस्कृति की गरिमा बनाए रखने का आह्वान

हरिद्वार में श्री अखंड परशुराम अखाड़ा ने नवरात्र के अवसर पर युवाओं से सनातन संस्कृति और राष्ट्रभक्ति को सशक्त बनाने की अपील की। अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने धार्मिक आयोजनों में देवी-देवताओं का स्वरूप धारण कर नाच-गाने पर रोक लगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह सनातन संस्कृति की गरिमा के विपरीत है। उन्होंने आयोजकों से झांकियों को सुसंस्कृत और स्वच्छ बनाने की अपील की, ताकि समाज में श्रद्धा और संस्कार बने रहें। उन्होंने धार्मिक कार्यक्रमों में केवल धार्मिक भजन और राष्ट्रगीत बजाने और पाश्चात्य धुनों से बचने का भी आह्वान किया।