हरिद्वार: आईटीसी मिशन सुनहरा कल और श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम ने “स्वच्छता ही सेवा” पखवाड़े के अंतर्गत हरिद्वार में ‘स्वच्छोत्सव 2025’ का सफल आयोजन किया, जिसने पावन नगरी में स्वच्छता, स्वास्थ्य और सामाजिक समृद्धि का एक व्यापक जनांदोलन खड़ा किया।
इस अभिनव पहल के तहत, हनुमानगढ़ी, दक्षेश्वर महादेव, चंडीदेवी और मनसा देवी जैसे प्रमुख मंदिरों को स्वच्छ किया गया और भित्ति-चित्रों से सजाया गया। मंदिरों से निकलने वाले पुष्पों (निरमाल्य) को गंगा में विसर्जित करने के बजाय सरस केंद्र, जमालपुर कलां भेजा गया, जहाँ महिला समूहों और दिव्यांग छात्र-छात्राओं ने उन्हें धूपबत्ती व अगरबत्ती में परिवर्तित किया। इस ‘दिव्य और उपयोगी’ पहल से न केवल गंगा प्रदूषण रुका बल्कि स्थानीय रोजगार भी सृजित हुए।
नगर निगम हरिद्वार से विशाल जन-जागरूकता रैली निकाली गई, जिसमें छात्रों और स्वयंसेवकों ने 300 किलो अपशिष्ट एकत्र कर निस्तारण किया। नगर आयुक्त श्री नंदन कुमार, IAS ने इसे ‘जीवन की अनिवार्यता’ बताते हुए सहयोग की सराहना की।
‘मिशन सुनहरा कल’ का बहुआयामी स्वरूप भी सामने आया:
- शिक्षा: 75 सरकारी विद्यालयों और 50 आंगनवाड़ियों को शिक्षण सामग्री और पेंटिंग से सुसज्जित किया गया, साथ ही डिजिटल शिक्षा प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया।
- महिला सशक्तिकरण: 350 अल्ट्रा पुअर महिलाओं को आजीविका मिशन से जोड़ा गया और महिला स्वयं-सहायता समूहों को कौशल विकास व विपणन का प्रशिक्षण दिया गया।
- स्वास्थ्य: विश्व हृदय दिवस पर 72 ‘स्वच्छ दूतों’ का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ, साथ ही पोषण व मातृ स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए।
- पर्यावरण: वॉटर हार्वेस्टिंग, चेक डैम और तालाब पुनर्जीवन जैसी पहलों से जल स्तर सुधरा और ‘ग्रीन गंगा पहल’ के तहत व्यापक पौधरोपण हुआ।
पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस कार्य को उत्तराखंड के भविष्य को बदलने वाला बताया। स्वच्छ दूत नूर अहमद ने सम्मान मिलने पर भावुक होकर कहा कि यह पहल दर्शाती है कि स्वच्छता कर्मी समाज की असली ताक़त हैं।
रोशनाबाद में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्वच्छता, पोषण और सुरक्षित मातृत्व का संदेश दिया गया। यह ‘स्वच्छोत्सव’ सिद्ध करता है कि प्रशासन, सामाजिक संस्थाएँ और नागरिक मिलकर ‘स्वच्छ मंदिर – स्वस्थ समाज – समृद्ध राष्ट्र’ का संदेश हरिद्वार से पूरे देश में गूंजा सकते हैं।














