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जगजीतपुर में हाथियों की चहलकदमी से दहशत, बाल-बाल बचे लोग

हरिद्वार। कनखल के जगजीतपुर क्षेत्र में जंगली हाथियों के आबादी में आने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार देर रात जंगल से निकलकर चार विशालकाय हाथी रिहायशी गलियों और सड़कों पर पहुंच गए, जिससे स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया।

​ग्रामीणों ने शोर मचाकर हाथियों को आबादी से दूर खदेड़ा। गनीमत रही कि इस दौरान कोई जनहानि या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायतों के बावजूद इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है, जिससे भविष्य में बड़ी दुर्घटना का भय बना हुआ है।

अर्द्धकुंभ को ‘कुंभ’ का नाम देना परंपराओं का उल्लंघन: अशोक त्रिपाठी

हरिद्वार। श्री गंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने सरकार द्वारा अर्द्धकुंभ को कुंभ के रूप में मनाए जाने के निर्णय पर कड़ा विरोध जताया है। मंगलवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि कुंभ का आयोजन विशेष खगोलीय और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर होता है, जिसे कृत्रिम रूप से बदला नहीं जा सकता।

त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि अर्द्धकुंभ को कुंभ घोषित करना पौराणिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार एक ‘तीर्थ’ है, इसे ‘पर्यटन स्थल’ में तब्दील करने से पुरोहित और संत समाज को नुकसान होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है, ताकि धर्मनगरी की दिव्यता और परंपराएं सुरक्षित रह सकें।

विश्व जल दिवस पर सम्मान समारोह आयोजित

हरिद्वार: विश्व जल दिवस-2026 के अवसर पर जिला आपदा प्रबंधन सभागार में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत की उपस्थिति में ‘आईटीसी मिशन सुनहरा कल’ और ‘श्रीभुवनेश्वरी महिला आश्रम’ द्वारा स्वच्छता और जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली मोहल्ला समितियों, स्वच्छ दूतों और विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

कन्या गुरुकुल में सम्मोहन चिकित्सा कार्यशाला

हरिद्वार: कन्या गुरुकुल के मनोविज्ञान विभाग में ‘हिप्नोथेरेपी’ (सम्मोहन चिकित्सा) पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। मुख्य वक्ता निधि कोटियाल और ताशू गर्ग ने छात्राओं को सम्मोहन के वैज्ञानिक महत्व, इसके इतिहास और मानसिक स्वास्थ्य (डिप्रेशन, चिंता) में इसके लाभों के बारे में बताया। कार्यशाला में मस्तिष्क की तरंगों (थीटा, बीटा, एल्फा) के प्रभाव और विभिन्न विश्राम तकनीकों का अभ्यास भी कराया गया।