लक्सर: अवैध खनन में लापरवाही पर वन आरक्षी निलंबित, डीएफओ ने की सख्त कार्रवाई

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पिछले काफी समय से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन होने की निरंतर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इन शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए विभाग द्वारा मामले की गोपनीय और विस्तृत जांच कराई गई। जांच प्रक्रिया के दौरान संबंधित क्षेत्र के वन आरक्षी वैभव सिंघल की भूमिका और कार्यप्रणाली में गंभीर लापरवाही के प्रमाण मिले। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि वन आरक्षी ने अपने क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए। इस रिपोर्ट के आधार पर प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) की संस्तुति के पश्चात संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया गया।

​डीएफओ स्वपलिन अनिरुद्ध ने इस प्रकरण की पुष्टि करते हुए बताया कि भोगपुर दक्षिणी बीट में अवैध खनन के मामले को विभाग ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में वन आरक्षी वैभव सिंघल द्वारा अपने कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरतने की पुष्टि हुई है। वन आरक्षी द्वारा अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए अपेक्षित कार्रवाई न करना उत्तराखंड सरकारी सेवक आचरण नियमावली 2002 का सीधा उल्लंघन माना गया है। इसी के फलस्वरूप, अनुशासन एवं अपील नियमावली 2003 के सुसंगत प्रावधानों के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। विभाग ने इस मामले में आगे की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं और चेतावनी दी है कि संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

​निलंबन की अवधि के दौरान वैभव सिंघल का मुख्यालय उप वन प्रभाग कार्यालय रुड़की तय किया गया है। इसके साथ ही, विभाग अब इस बिंदु पर गहनता से जांच कर रहा है कि इस अवैध खनन सिंडिकेट के पीछे और किन-किन लोगों का हाथ है। लक्सर रेंज अधिकारी महेंद्र गिरी ने बताया कि इस मामले में संबंधित कर्मचारी को सुधरने का मौका दिया गया था और 28 जनवरी 2026 को उनसे अवैध खनन के संबंध में स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। इसके बावजूद, क्षेत्र में अवैध खनन की गतिविधियां रुकने के बजाय निरंतर जारी रहीं। लापरवाही की पूरी तरह पुष्टि होने के बाद ही विभाग ने निलंबन का कड़ा कदम उठाया है। इसी कड़ी में, विभाग ने पट्टा धारक नंदकिशोर के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) भी दर्ज कराई है और मामले की कानूनी व विभागीय जांच तेज कर दी गई है।