वन भूमि पर बसे लोगों को मिलेगा मालिकाना हक -सुबोध उनियाल

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​उत्तराखंड सरकार ने दशकों से वन भूमि पर रह रहे लोगों की समस्याओं को सुलझाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। गैरसैंण में चल रहे बजट सत्र के दौरान वन मंत्री सुबोध उनियाल ने घोषणा की कि सरकार ऐसे भूखंडों को ‘गैर आरक्षित वन भूमि’ घोषित करने का प्रस्ताव कैबिनेट में लाएगी।

  • अधिकारों की बहाली: बिंदुखत्ता, बापूग्राम और गोलापार जैसे क्षेत्रों में वन भूमि पर बसे परिवारों को भूमिधरी अधिकार देने की तैयारी है।
  • नियमों में बदलाव: सरकार वन संरक्षण अधिनियम 1980 से पहले के बसे लोगों को राहत देने के लिए नियमों में आवश्यक बदलाव पर विचार कर रही है।
  • टिहरी विस्थापितों का मुद्दा: टिहरी बांध के कारण विस्थापित हुए लोगों को, जिन्हें हरिद्वार में बसाया गया था, उन्हें भी अभी तक मालिकाना हक नहीं मिला है। सरकार अब इस जमीन को ‘राजस्व भूमि’ घोषित कर उन्हें अधिकार देने की योजना बना रही है।
  • विपक्ष की मांग: कांग्रेस विधायकों (यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, भुवन कापड़ी आदि) ने सरकार पर दबाव बनाया कि दशकों से रह रहे लोगों को ‘अतिक्रमणकारी’ कहना बंद किया जाए और उन्हें तुरंत राहत दी जाए।
  • बेदखली का संकट: चमोली की पिंडर घाटी में लगभग 2000 से ज्यादा लोगों को बेदखली के नोटिस दिए गए हैं, जिस पर सदन में चिंता व्यक्त की गई।

सरकार का कहना है कि वह लोगों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार नियमानुसार समाधान निकाला जा रहा है।