हरिद्वार:
धर्मनगरी हरिद्वार के कनखल स्थित श्री यंत्र मंदिर में पवित्र पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। कथा के तीसरे दिन श्रद्धालु भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए प्रख्यात कथाव्यास आचार्य नीरज जोशी ने माता सती के दिव्य चरित्र और कलयुग में भागवत महात्म्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कलयुग में मोक्ष का मार्ग हैं गंगा और भागवत कथा
कथाव्यास आचार्य नीरज जोशी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि कलयुग में मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्ति और मोक्ष दिलाने के लिए चार स्तंभ मुख्य हैं— गीता, गायत्री, गंगा और श्रीमद् भागवत कथा। जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से इनका आश्रय लेता है, उसका कल्याण निश्चित है।
पतिव्रता धर्म और माता सती का बलिदान
माता सती के प्रसंग की व्याख्या करते हुए आचार्य जोशी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पतिव्रता स्त्री का धर्म सर्वश्रेष्ठ माना गया है। उन्होंने राजा दक्ष के यज्ञ की कथा सुनाते हुए कहा:
”जब राजा दक्ष द्वारा कनखल में विशाल यज्ञ का आयोजन किया गया, तो उसमें भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया। माता सती जब बिना निमंत्रण के वहाँ पहुँचीं, तो उन्होंने यज्ञशाला में अपने पति भगवान शिव का स्थान (भाग) नहीं देखा। इतना ही नहीं, उनके पिता राजा दक्ष द्वारा महादेव के प्रति अपमानजनक शब्द कहे गए। अपने आराध्य और पति का यह अपमान माता सती सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने पति के सम्मान की रक्षा के लिए यज्ञ कुंड की अग्नि में कूदकर अपने प्राणों की आहुति दे दी।”
आचार्य ने कहा कि माता सती का यह कदम पतिव्रता धर्म की पराकाष्ठा का प्रतीक है।
संत समाज की गरिमामयी उपस्थिति
कथा के तीसरे दिन हरिद्वार के कई शीर्ष संतों और महामंडलेश्वरों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित संतों में शामिल थे:
- महामंडलेश्वर ललितानंद गिरी महाराज (पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी एवं महंत, भारत माता मंदिर)
- महामंडलेश्वर रवि देव शास्त्री (प्रमुख, गरीब दासी संप्रदाय)
- महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद महाराज
- महामंडलेश्वर कृष्णानंद महाराज
- महामंडलेश्वर स्वामी रामानंद महाराज
उपस्थित सभी संतों ने पुरुषोत्तम मास (मलमास) में श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण और धार्मिक अनुष्ठानों के महत्व के बारे में श्रद्धालुओं को विस्तार से बताया।
यजमानों ने जताया आभार
इस धार्मिक अनुष्ठान के मुख्य यजमान हेमचंद्र जोशी, प्रकाश चंद जोशी एवं रमेश चंद्र जोशी ने संयुक्त रूप से कथा में पधारे सभी संतों का आशीर्वाद लिया और बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भक्तों का आभार व्यक्त किया।













