बाल-अधिकार और पुनर्वास को मिलेगी नई दिशा: हरिद्वार में उच्च न्यायालय और महिला कल्याण विभाग का साझा मंथन

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  1. उत्तराखंड उच्च न्यायालय की किशोर न्याय समिति तथा महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में हरिद्वार में ‘किशोर न्याय अधिनियम, 2015’ के क्रियान्वयन के एक दशक की समीक्षा हेतु राज्य स्तरीय हितधारक परामर्श का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं अन्य न्यायाधीशों द्वारा किया गया, जिसमें 180 से अधिक प्रशासनिक व न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता की। अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश ने कानून के व्यावहारिक एवं प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया, वहीं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने कहा कि देखरेख या विधि से संघर्षरत बच्चा दंड नहीं बल्कि पुनर्वास और समाज में पुनः एकीकरण का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त, न्यायमूर्ति आलोक महरा और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय ने समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया तथा दूरस्थ क्षेत्रों तक बाल संरक्षण पहुँचाने की आवश्यकता जताई। दिनभर आयोजित पाँच तकनीकी सत्रों में दत्तक ग्रहण, प्रारंभिक मूल्यांकन और बच्चों के पुनर्वास जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर विषय-विशेषज्ञों द्वारा गहन विचार-विमर्श किया गया।