हरिद्वार में विजयदशमी के पावन पर्व पर मंगलवार को श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी में विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजन का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान अखाड़े के इष्ट देवताओं के रूप में सूर्य प्रकाश और भैरव प्रकाश के साथ-साथ अखाड़े के प्राचीन अस्त्र-शस्त्रों की विशेष पूजा-अर्चना की गई। यह पूरी पूजा पंडित अवधेश शर्मा के आचार्यत्व में संपन्न कराई गई, जिसमें अखाड़े के तमाम संतों ने पूरी श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया और परंपरानुसार शस्त्र पूजन कर सनातन धर्म एवं संस्कृति की रक्षा करने का दृढ़ संकल्प लिया।
इस अवसर पर श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने देशवासियों को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शस्त्र पूजन की यह गौरवशाली परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और यह परंपरा मुख्य रूप से धर्म, संस्कृति तथा समाज की रक्षा के संकल्प का प्रतीक मानी जाती है।
श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने आगे बताया कि आदि शंकराचार्य भगवान ने समाज में शास्त्र के साथ-साथ शस्त्र की परंपरा का भी प्रतिपादन किया था। इसी महान परंपरा का निर्वहन करते हुए नागा संन्यासियों ने सनातन धर्म की रक्षा के खातिर शास्त्र के साथ शस्त्र धारण किए और देश पर आक्रमण करने वाले आक्रांताओं का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने कहा कि नागा संन्यासियों ने हमेशा धर्म और धार्मिक स्थलों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है।
अपने ऐतिहासिक संदर्भ को याद करते हुए उन्होंने कहा कि श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। काशी विश्वनाथ मंदिर की रक्षा के लिए इस अखाड़े के सैकड़ों नागा संन्यासियों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था, और उनका यह त्याग व समर्पण सनातन धर्म के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने अंत में कहा कि विजयदशमी का यह पावन पर्व हमें हमेशा सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है, और शस्त्र पूजन की प्राचीन परंपरा इसी भावना को आगे बढ़ाने का काम करती है।
इस गरिमामयी अवसर पर महंत कैलाश भारती, श्रीमहंत मनोज गिरि, महंत विनोद गिरि उर्फ हनुमान बाबा, स्वामी ज्ञान भारती, स्वामी हरिशंकर गिरि, स्वामी किशनपुरी और स्वामी कुंदन पुरी महाराज सहित अखाड़े के अनेक गणमान्य संत-महंत उपस्थित रहे।














