समान नागरिक संहिता उत्तराखंड के लिए गौरव की बात- महंत रवींद्र पुरी महाराज

उत्तराखंड पहला राज्य जो महिलाओं को समान अधिकार प्रदान कर रहा है- सिविल
हरिद्वार: एस. एम. जे. एन. पीजी कॉलेज हरिद्वार में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में समान नागरिक संहिता पर चर्चा हुई। सेमिनार में लिव-इन रिश्तों को भी कानून के दायरे में लाने पर जोर दिया गया।
मुख्य बातें:

* समान अधिकार:
* सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि समान नागरिक संहिता महिलाओं को विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में पुरुषों के बराबर अधिकार देती है।
* सिविल जज सिमरनजीत कौर ने कहा कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य है, जो महिलाओं को समान अधिकार प्रदान कर रहा है।
* लिव-इन रिश्ते:
* कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि समान नागरिक संहिता के तहत लिव-इन रिश्तों को भी नियमित किया जाएगा।
* उन्होंने कहा कि यह संहिता देश को आधुनिकता की ओर ले जाने वाला एक मजबूत प्रयास है।
* जन जागरूकता:
* सेमिनार का उद्देश्य समान नागरिक संहिता के बारे में लोगों को जागरूक करना था।
* वक्ताओं ने कहा कि लोगों को इस कानून को विस्तार से समझने की जरूरत है।
* अन्य वक्ताओं के विचार:
* अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविन्द्र पुरी जी महाराज ने कहा कि यह संहिता उत्तराखंड के लिए गौरव की बात है।
* अधिशठाता छात्र कल्याण डॉक्टर संजय माहेश्वरी ने भी अपने विचार रखे।
* श्री रमन सैनी एडवोकेट जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरिद्वार ने संविधान और समान नागरिक संहिता के बारे में अपने विचार रखे।
* हरिद्वार नागरिक मंच के संस्थापक अध्यक्ष श्री सतीश जैन ने कहा कि समान नागरिक संहिता, सर्व धर्म समभाव को संजोता हुआ क़ानून हैं।
* महाविद्यालय के पुरातन छात्र तथा प्रसिद्ध समाजसेवी श्री जगदीश लाल पाहवा ने महाविद्यालय के प्रयासों की सराहना की।
सेमिनार में कॉलेज के शिक्षकों, छात्रों और समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने भाग लिया।














