दो रुपये की अधिक वसूली पर भी स्टाम्प विक्रेता पर चलेगा मुकदमा: उच्चतम न्यायालय की सख्त टिप्पणी

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नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने स्टाम्प विक्रेताओं द्वारा मामूली सी भी अधिक राशि वसूलने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि कोई भी स्टाम्प विक्रेता निर्धारित मूल्य से थोड़ा भी अधिक पैसा लेता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी न्यायालय ने एक विशेष मामले की सुनवाई के दौरान की, जहाँ एक स्टाम्प विक्रेता पर मात्र ₹20 के स्टाम्प पेपर के लिए ₹2 अतिरिक्त लेने का आरोप था।
न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि स्टाम्प पेपर आवश्यक वस्तु हैं और इनकी बिक्री में किसी भी प्रकार की अनियमितता या अधिक वसूली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने जोर देकर कहा कि स्टाम्प विक्रेताओं को सरकार द्वारा निर्धारित दरों का सख्ती से पालन करना चाहिए और मामूली सी भी अधिक राशि वसूलना कानून का उल्लंघन है।
इस मामले में, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि एक लाइसेंसीकृत स्टाम्प विक्रेता ने उनसे ₹20 के स्टाम्प पेपर के लिए ₹22 लिए थे। निचली अदालत ने विक्रेता को इस आधार पर राहत दे दी थी कि अतिरिक्त राशि बहुत मामूली है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा, “भले ही अतिरिक्त राशि ₹2 ही क्यों न हो, यह एक अवैध वसूली है। स्टाम्प विक्रेता जनता से इस प्रकार अधिक पैसे लेने के लिए अधिकृत नहीं हैं।” न्यायालय ने आगे कहा कि इस तरह की छोटी-छोटी अवैध वसूलियां मिलकर एक बड़ी समस्या बन सकती हैं और आम नागरिकों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती हैं।
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को वापस निचली अदालत में भेज दिया है और उसे कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। न्यायालय की यह सख्त टिप्पणी स्टाम्प विक्रेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखनी होगी। अब मामूली सी भी अधिक वसूली उन्हें कानूनी मुश्किल में डाल सकती है।
इस फैसले का आम जनता पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है, खासकर उन लोगों पर जो अक्सर स्टाम्प पेपर खरीदते हैं।