
हरिद्वार/देहरादून: 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर, आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग, उत्तराखंड और निरामया योगम रिसर्च फाउंडेशन, हरिद्वार ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना के तहत एक भव्य योग कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य योग की वैज्ञानिकता के साथ-साथ इसके सामाजिक और मानसिक स्वा: स्थ्य लाभों पर जोर देना था।
फाउंडेशन की निदेशक योगाचार्या डॉ. उर्मिला पांडे के प्रेरणादायक योगा गीत से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। डॉ. स्वामी श्री संतोषानंद देव जी ने आज की व्यस्त जीवनशैली में योग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “आज की जीवनशैली में 15 मिनट का योगा ब्रेक भी जीवन को नया अर्थ दे सकता है।” समाजसेवी श्री जगदीश लाल पाहवा ने योग को “मन और शरीर की चिकित्सा का सरल किंतु असरकारी साधन” बताया और इसे जीवनशैली में शामिल करने की अपील की।
इसी दिन, उत्तराखंड राजभवन में भी एक विशेष योग अभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहाँ डॉ. उर्मिला पांडे के निर्देशन में योग प्रशिक्षकों पदमा, मनीषा और दीपशिखा ने अधिकारियों और कर्मचारियों को योगासन और प्राणायाम का अभ्यास कराया। इस अवसर पर वित्त नियंत्रक डॉ. तृप्ति श्रीवास्तव, अनुसचिव लक्ष्मण राम आर्य, डॉ. पंकज और अन्य अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नरेश चौधरी ने किया।
योग दिवस की पूर्व संध्या पर ‘योग फॉर मेंटल हेल्थ’ विषय पर आयोजित 13वीं राष्ट्रीय कार्यशाला का भी समापन हुआ, जहाँ प्रतिभागियों को योगा टी-शर्ट, योग मैट, सूक्ष्म जलपान और योग बुकलेट वितरित किए गए। डॉ. विशाल महिंद्रू ने योगाभ्यास प्रोटोकॉल का अभ्यास कराते हुए कार्यक्रम का संचालन किया। इस आयोजन में डॉ. सौम्य बाजपेई, डॉ. विकास दुबे, डॉ. घनेंद्र वशिष्ठ, रंजीता झा, अवनी शर्मा और डॉ. विदिशा सहित कई विशेषज्ञ और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।














