हरिद्वार: अखिल भारतीय वरिष्ठ नागरिक महासंघ कल, 1 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस मनाएगा। इस अवसर पर महासंघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वरिष्ठ नागरिकों से जुड़ी प्रमुख समस्याओं के निराकरण की मांग की है।
प्रेस क्लब सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में महासंघ के अध्यक्ष एमके रैना ने बताया कि अखिल भारतीय वरिष्ठ नागरिक महासंघ देश का सबसे बड़ा वरिष्ठ नागरिक संगठन है, जो 20 से अधिक राज्यों में संबद्ध संगठनों के माध्यम से 30 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों का प्रतिनिधित्व करता है।
मुख्य मांगें और चिंताएं:
- रेलवे यात्रा रियायतों की तत्काल बहाली:
- महासंघ ने कोविड-19 महामारी के दौरान बंद की गई रेलवे यात्रा रियायतों को अब तक बहाल न किए जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है, इसे वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा का अपमान बताया है।
- उन्होंने कहा कि लगभग 15 करोड़ वरिष्ठ नागरिक इससे प्रभावित हो रहे हैं। यह रियायत राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक नीति, 1999 की सिफारिशों के तहत दशकों से लागू थी।
- रैना ने जोर दिया कि जब देश बुलेट ट्रेन और अंतरिक्ष मिशनों में प्रगति कर रहा है, तब वरिष्ठ नागरिकों को पहले से मिली रियायत से वंचित करना उचित नहीं है।
- पृथक ‘वरिष्ठ नागरिक मंत्रालय’ की स्थापना:
- एसोसिएशन ने नीति आयोग की वरिष्ठ देखभाल पर स्थिति पत्र (फरवरी 2024) का हवाला देते हुए एक अलग वरिष्ठ नागरिक मंत्रालय बनाने की मांग की है।
- उन्होंने चेतावनी दी कि भारत में बुजुर्गों की जनसंख्या 2050 तक 20 प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना है। यदि समय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह गंभीर मानवीय पीड़ा और आर्थिक बोझ का कारण बन सकती है।
महासंघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए रेलवे रियायतें तत्काल बहाल की जाएँ और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी को देखते हुए वरिष्ठ नागरिक मंत्रालय की स्थापना की जाए।
पत्रकार वार्ता में एमके रैना के अतिरिक्त भीम सेन श्रीधर, सर्वेश गुप्ता, सुरेश पालगे, एसके अग्रवाल और आरके अनेजा भी उपस्थित रहे।














