हरिद्वार/ डरबन। निरंजनी अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संत स्वामी रामभजन वन बताते हैं कि पंचदिवसीय त्योहार दिवाली जल्द ही शुरू होने वाला है, जिसका आरंभ धनतेरस से होता है। वहीं, भाई दूज के साथ इसका समापन होता है। हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।
पूजा का महत्व:
इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन खरीदारी करने का भी विशेष महत्व होता है। भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से अरोग्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
धनतेरस की तिथि को लेकर शंका का समाधान:
स्वामी रामभजन वन ने इस बार धनतेरस की तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों की शंका का समाधान करते हुए कहा:
- त्रयोदशी तिथि का आरंभ: 18 अक्टूबर, शनिवार को दोपहर में 12 बजकर 20 मिनट से।
- त्रयोदशी तिथि की समाप्ति: 19 अक्टूबर, रविवार को दोपहर के 1 बजकर 52 मिनट पर।
- शास्त्रों के अनुसार: जिस दिन प्रदोष काल में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि लगती है, उसी दिन धनतेरस का त्योहार मनाने की परंपरा है।
- निष्कर्ष: ऐसे में यह त्योहार 18 अक्टूबर के दिन मनाया जाएगा। जो लोग 18 तारीख को खरीदारी न कर पाएं, वे 19 अक्टूबर को भी दोपहर के 1 बजकर 52 मिनट तक खरीदारी कर सकते हैं।
- अर्थात: इस बार धनतेरस 18 और 19 अक्टूबर दो दिन मनाया जा सकता है।
धनतेरस 2025 शुभ मुहूर्त
1. 18 अक्टूबर, शनिवार (पूजा और खरीदारी के लिए उत्तम):
- प्रदोष काल का मुहूर्त (सबसे उत्तम): शाम के 4 बजकर 48 मिनट से लेकर शाम के 6 बजकर 18 मिनट तक।













