भगवान भास्कर की आराधना का चार दिवसीय महापर्व छठ शनिवार को नहाय-खाय के साथ हरिद्वार में शुरू हो गया है। व्रतियों ने कद्दू भात खाकर व्रत का संकल्प लिया।
- अगला चरण: रविवार को खरना पूजन होगा, जिसके बाद व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा।
- अर्घ्य: सोमवार शाम को अस्ताचलगामी सूर्य और मंगलवार सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, जिसके बाद पर्व का पारण के साथ समापन होगा।
- तैयारियां: छठ महापर्व को लेकर लोगों में खासा उल्लास है। हरिद्वार के गंगा घाटों पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और साफ-सफाई की व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है। बाजारों में नहाय-खाय के लिए पूजन सामग्री और कद्दू, चावल, दाल आदि की खरीदारी के लिए दिनभर चहल-पहल रही।
- शुभ संयोग: आचार्य पंडित उद्धव मिश्रा के अनुसार, नहाय-खाय शोभन, रवि एवं सिद्ध योग के उत्तम संयोग में हुआ। खरना रवियोग व सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा।
- धार्मिक महत्व: छठ व्रत की परंपरा ऋग्वैदिक काल से चली आ रही है। आचार्य भोगेंद्र झा के अनुसार, यह पर्व शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का है। छठ महापर्व के दौरान व्रती पर छठी मैया की विशेष कृपा बरसती है।
- स्वास्थ्य लाभ: समाजसेवी रंजीता झा ने बताया कि नहाय-खाय में लौकी की सब्जी, अरवा चावल, चने की दाल और आंवला की चासनी के सेवन का महत्व है, जिससे संतान प्राप्ति की मान्यता है। खरना के प्रसाद में ईख के कच्चे रस और गुड़ का सेवन त्वचा रोग, आंख की पीड़ा को समाप्त करता है और निरोगिता व बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करता है। मौसम में फास्फोरस की कमी दूर करने के लिए गुड़ का प्रयोग आवश्यक है।
- माहौल: तीर्थनगरी में घाटों को रंगीन रोशनी से सजाया गया है और छठ गीतों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है।














