
हरिद्वार, 07 नवम्बर। देवभूमि हरिद्वार स्थित मिश्री मठ में आयोजित पंचदिवसीय पूर्णिमा महोत्सव (साधक महासम्मेलन) एवं देवभूमि रजत महोत्सव में अध्यात्म और संस्कृति का अद्भुत समागम देखने को मिला। इस आयोजन में श्री चक्रपाणि जी महाराज और करौली शंकर महादेव के प्रेरणादायी प्रवचनों से देशभर के हजारों साधक लाभान्वित हुए।
मुख्य बातें:
- श्री चक्रपाणि जी महाराज का उद्बोधन:
- उन्होंने करौली शंकर महादेव जी के चरणों में नमन किया और उनके सान्निध्य को परमानंद की अनुभूति और आत्मा की सर्विसिंग के समान बताया।
- महाराज जी ने कहा कि करौली सरकार की शरण में आने वाला व्यक्ति न केवल सांसारिक शांति, बल्कि मुक्ति का मार्ग भी प्राप्त करता है।
- उन्होंने करौली सरकार को अध्यात्म, सत्य और मोक्ष की सरकार बताया, जो कभी गिर नहीं सकती।
- उन्होंने साधकों से ज्योति से ज्योति जलाने और अनुभव को दूसरों तक पहुंचाने का आग्रह किया।
- महाराज जी ने कहा कि भारत ऐसे संतों की तपस्या से ही पुनः विश्वगुरु बनेगा।
- करौली शंकर महादेव का संदेश:
- उन्होंने साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि “साधना से दिवास्वप्न टूटते हैं और साधक मृत्यु में जीना सीखते हैं।”
- उन्होंने बताया कि साधना हमें जीवन में अनुशासन करते हुए सद्मार्ग की ओर अग्रसर करती है।
- जिस प्रकार नदी सागर से मिलती है, उसी प्रकार साधक भी साधना से ईश्वर के श्रीचरणों में स्थान पाता है।
- आयोजन का महत्व:
- इस महोत्सव ने हजारों साधकों को एक मंच पर लाकर योग, आध्यात्म, मंत्र साधना और पूज्य संतों के दर्शन व प्रवचनों का दिव्य लाभ प्रदान किया।














