अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया है। न्याय की सुस्त प्रक्रिया और मामले के कुछ अनसुलझे पहलुओं को लेकर जनता में आक्रोश है। इसी क्रम में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने एक सुर में राज्यव्यापी बंद की घोषणा की थी।
मुख्य मांगें और CBI जांच का मुद्दा
प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग इस मामले की CBI जांच को लेकर है। हालांकि, राज्य सरकार ने पहले ही इस मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि:
- जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी (Supervision) में होनी चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
- केस के “वीआईपी” (VIP) चेहरे का नाम सार्वजनिक किया जाए और कड़ी सजा दी जाए।
- स्थानीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर संदेह जताते हुए केंद्रीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
देहरादून (Dehradun) में बंद का मिला-जुला असर
राजधानी देहरादून में बंद का असर आंशिक रहा। इसका मुख्य कारण व्यापारी संगठनों में मतभेद था:
- व्यापार मंडल का रुख: दून उद्योग व्यापार मंडल ने इस बंद में आधिकारिक रूप से हिस्सा न लेने का निर्णय लिया। इसके परिणामस्वरूप शहर के मुख्य बाजार जैसे पलटन बाजार और राजपुर रोड पर दुकानें सामान्य रूप से खुली रहीं।
- शांतिपूर्ण प्रदर्शन: शहर के कुछ हिस्सों में प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण रैलियां निकालीं और नारेबाजी की।
- सेवाएं: सार्वजनिक परिवहन (बसें, ऑटो) और आवश्यक सेवाएं पूरी तरह सुचारू रहीं, जिससे आम जनजीवन पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा।
हरिद्वार (Haridwar) और अन्य जिलों की स्थिति
धर्मनगरी हरिद्वार में भी बंद का कोई व्यापक असर देखने को नहीं मिला:
- विपक्षी दलों का समर्थन: कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने बंद का नैतिक समर्थन किया, लेकिन धरातल पर व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले रहे।
- सुरक्षा व्यवस्था: किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने बाजारों और मुख्य चौराहों पर भारी बल तैनात किया था।
- सामान्य जनजीवन: स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तर अपने निर्धारित समय पर खुले।
वर्तमान स्थिति और सरकारी प्रतिक्रिया
राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक छुट्टी या बंद का आदेश नहीं था, इसलिए पूरे प्रदेश में परिवहन और आवश्यक सेवाएं सामान्य रहीं। प्रदर्शनकारी संगठनों ने जनता से स्वेच्छा से सहयोग करने की अपील की थी।
नोट: पुलिस महानिदेशालय ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है।













