
हरिद्वार के शांतिकुंज में गायत्री परिवार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की साधना के शताब्दी वर्ष, माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी और अखंड दीप के प्राकट्य शताब्दी समारोह का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर विश्व के 20 से अधिक देशों से होकर गुजरी ‘ज्योति कलश यात्रा’ अपनी मातृसंस्था पहुंची।
नए युग का शुभारंभ है यह समारोह: राज्यपाल
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि इसे केवल एक आयोजन का समापन नहीं, बल्कि ‘युग परिवर्तन’ का श्रीगणेश माना जाना चाहिए। उन्होंने इसे “चेतना का महाकुंभ” बताते हुए कहा कि शांतिकुंज द्वारा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र निर्माण की जो यात्रा शुरू की गई है, वह पूरी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है।
राज्यपाल ने आगे कहा:
”शांतिकुंज केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक प्रयोगशाला है जहाँ श्रेष्ठ नागरिकों का निर्माण होता है। गायत्री परिवार का 80 से अधिक देशों में फैला यह आंदोलन राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार बन चुका है।”

विश्व शांति का मार्ग है सनातन मूल्य: शिवराज सिंह चौहान
विशिष्ट अतिथि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गायत्री परिवार के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ‘अखंड ज्योति’ केवल बाहरी प्रकाश नहीं है, बल्कि यह वह ज्योति है जो मनुष्य के अंतर्मन को प्रकाशित कर बुद्धि को विवेक और कर्म को धर्म से जोड़ती है।
वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा:
- वर्तमान में विश्व अशांति और संघर्ष के दौर से गुजर रहा है।
- ऐसे समय में भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्य ही दुनिया को सही दिशा दिखा सकते हैं।
- गायत्री परिवार द्वारा रोपे गए संस्कार ही विश्व में शांति और सद्भाव स्थापित करने में सक्षम हैं।
डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने इस अवसर को ‘सौभाग्य की त्रिवेणी’ बताते हुए कहा कि सच्ची साधना का मार्ग चमत्कार नहीं, बल्कि स्वयं का परिष्कार है। उन्होंने साधकों को जीवन में ग्रहणशीलता और सेवा भाव विकसित करने का संदेश दिया।














