श्यामपुर वन रेंज में दो बाघों की संदिग्ध मौत के मामले ने पूरे वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। मामले में वन विभाग ने कार्रवाई तेज करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आशिक पुत्र गामा और जुप्पी पुत्र अल्लू के रूप में हुई है। इससे पहले आलम उर्फ फम्मी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि चौथा आरोपी आमिर हमजा उर्फ मियां अभी भी फरार बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
घटना के बाद प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल स्वयं बुधवार को घटनास्थल पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और यदि किसी वन अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उन्हें तत्काल निलंबित किया जाएगा। मंत्री के दौरे के बाद विभागीय स्तर पर हलचल बढ़ गई और डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने संबंधित रेंजर, फॉरेस्टर और फॉरेस्ट गार्ड से जवाब तलब किया है।
जानकारी के अनुसार, मामला श्यामपुर रेंज की सजनपुर बीट का है। वन कर्मियों की गश्त के दौरान कुछ वन गुज्जर संदिग्ध परिस्थितियों में जंगल क्षेत्र में दिखाई दिए। पूछताछ में उन्होंने बताया कि उनकी भैंस जंगल में खो गई है। हालांकि वन कर्मियों को इस बात पर संदेह हुआ क्योंकि जिस क्षेत्र में वे मौजूद थे वहां सामान्य रूप से पशु चराने की अनुमति नहीं है और न ही वहां ग्रामीणों की आवाजाही होती है।
संदेह के आधार पर वन विभाग ने क्षेत्र में व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया। रविवार शाम जंगल से एक नर बाघ का शव बरामद हुआ। इसके अगले दिन पास के इलाके से लगभग दो वर्ष आयु की एक मादा बाघिन का शव भी मिला। दोनों शवों की स्थिति देखकर वन विभाग को विषाक्त भोजन खिलाकर हत्या किए जाने की आशंका हुई। जांच में सामने आया कि बाघिन ने आरोपियों की भैंस का शिकार कर लिया था। इसी का बदला लेने के लिए आरोपियों ने मृत भैंस के मांस पर जहरीला रसायन छिड़क दिया। बाघ और बाघिन ने वही मांस खा लिया, जिससे उनकी मौत हो गई।
वन विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने मृत बाघों के पंजे और अन्य अंग काट लिए थे। अधिकारियों को आशंका है कि वन्यजीव अंगों की अवैध तस्करी की तैयारी की जा रही थी। समय रहते घटना का खुलासा होने से वन्यजीव तस्करी के बड़े नेटवर्क का संकेत भी मिला है। अब वन विभाग इस एंगल से भी जांच कर रहा है कि आरोपियों के संपर्क किन लोगों से थे और क्या पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं।
घटना स्थल राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज से सटे बफर जोन में स्थित है, जिसे वन्यजीवों के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। ऐसे इलाके में लगातार निगरानी के बावजूद दो बाघों की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर भी लोगों में घटना को लेकर भारी आक्रोश है और वन्यजीव प्रेमियों ने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।
डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि मामले में अब तक चार आरोपियों की पहचान हो चुकी है। तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा रहा है, जबकि फरार आरोपी की तलाश जारी है। वन विभाग की टीमें मामले की हर पहलू से जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घटना के पीछे कोई बड़ा वन्यजीव तस्करी गिरोह तो सक्रिय नहीं है।
2026-05-21













