अखाड़ा परिषद में रार: श्रीमहंत रविंद्रपुरी और हरि गिरी गुट ने किया कुंभ मेला बैठक का बहिष्कार, दूसरी कार्यकारिणी को बताया असंवैधानिक

Listen to this article


हरिद्वार।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के भीतर चल रही आपसी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज (निरंजनी अखाड़ा) और महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरी ने दूसरे धड़े द्वारा बनाई गई नई कार्यकारिणी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी के नेतृत्व में गठित कार्यकारिणी को पूरी तरह ‘असंवैधानिक’ करार दिया है। इसके साथ ही, मेला प्रशासन पर उपेक्षा और हठधर्मी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कुंभ मेला बैठक का पूरी तरह से बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया।

​”संतों को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम कर रहा मेला प्रशासन”

​श्रीमहंत रविंद्रपुरी और श्रीमहंत हरि गिरी ने कुंभ मेला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद सभी 13 अखाड़ों के मेल से बनती है, लेकिन इस नई कार्यकारिणी के गठन से पहले न तो कोई एजेंडा जारी किया गया और न ही सभी 13 अखाड़ों को आमंत्रित किया गया। ऐसे में सिर्फ 8 अखाड़ों के दम पर किया गया यह गठन पूरी तरह से अवैध है।

​उन्होंने आरोप लगाया कि मेला प्रशासन संतों को आपस में जोड़ने के बजाय उन्हें तोड़ने का काम कर रहा है। अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए संतों ने कहा:

​”मेला प्रशासन ने बैठक के लिए दोपहर 3 बजे का समय तय किया था, लेकिन अधिकारी सुबह 11 बजे ही श्रीपंचायती अखाड़ा नया उदासीन पहुंच गए। अधिकारियों का यह मनमाना रवैया दिखाता है कि वे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार को भी ताक पर रखकर काम कर रहे हैं।”

​अधिकांश प्रमुख संत हमारे संपर्क में: श्रीमहंत हरि गिरी

​महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरी ने दावा किया कि दूसरा गुट जिन अखाड़ों के समर्थन की बात कह रहा है, उनके अधिकांश प्रतिनिधि वास्तव में उनके साथ हैं। उन्होंने बताया कि:

  • ​निर्मल अखाड़े के कश्मीर सिंह भूरी वाले और श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के श्रीमहंत रघुमुनि जैसे प्रमुख संत उनके निरंतर संपर्क में हैं।
  • ​जूना अखाड़ा, आह्वान अखाड़ा, अग्नि अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा, आनंद अखाड़ा सहित किन्नर, बाल्मीकि, रविदास और ओबीसी अखाड़ा भी उनके साथ ही शाही स्नान करते हैं।
  • ​उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भ्रम के कारण दूसरे गुट की बैठक में शामिल हुए आह्वान अखाड़े के सचिव सत्य गिरी भी अब सच्चाई जानकर वापस लौट आए हैं।

​मुख्यमंत्री धामी से करेंगे शिकायत

​फिलहाल नासिक में मौजूद श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि वे जल्द ही हरिद्वार लौटकर पूरी स्थिति को स्पष्ट करेंगे। इसके बाद अखाड़ा परिषद के संतों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर मेला प्रशासन की मनमानी और इस पूरे घटनाक्रम के तथ्यों से उन्हें अवगत कराएगा।

गौरतलब है कि बीते दिनों बैरागी कैंप में महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी के नेतृत्व में अखाड़ा परिषद की एक बैठक हुई थी, जिसमें 8 अखाड़ों के समर्थन का दावा करते हुए नई कार्यकारिणी का गठन किया गया था। इस कदम के बाद से ही दो धड़ों में बंटी अखाड़ा परिषद की यह जंग अब बेहद तेज हो गई है।