उत्तराखंड के सतत विकास और ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ सीएम आवास पर फहराया गया तिरंगा

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देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर अपने शासकीय आवास पर गरिमामय माहौल में ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री और वहां मौजूद सभी अधिकारियों तथा कर्मचारियों द्वारा सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ के राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत गायन के साथ हुई। राष्ट्रगान और वंदे मातरम् के पश्चात मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और वहां उपस्थित समस्त अधिकारियों व कर्मचारियों को देश की अखंडता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई।

​ध्वजारोहण कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में उन्होंने देश की आजादी की बलिवेदी पर अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले देश के वीर जवानों को भावपूर्ण नमन करते हुए उनका स्मरण किया।

​मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे अमर बलिदानियों ने जिस सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का सपना देखा था, वह आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में तेजी से साकार हो रहा है। उन्होंने देश के प्रत्येक नागरिक से अपील की कि प्रधानमंत्री द्वारा लिए गए विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए सभी को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ योगदान देना होगा। सामूहिक प्रयासों और जनभागीदारी को ही उन्होंने देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने का सबसे मुख्य साधन बताया।

​इसके साथ ही राज्य की प्रगति पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार प्रदेश के समग्र, संतुलित और सतत विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है। सरकार की यह प्राथमिकता है कि जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास का सीधा लाभ राज्य के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति, प्रत्येक क्षेत्र और हर वर्ग तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचे। उन्होंने विश्वास जताया कि जन-जन के सहयोग और सहभागिता से उत्तराखंड को देश का अग्रणी व श्रेष्ठ राज्य बनाने का लक्ष्य अवश्य हासिल होगा। अंत में उन्होंने सभी को स्मरण कराया कि स्वतंत्रता दिवस का यह ऐतिहासिक अवसर हम सभी को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों और दायित्वों का बोध कराने का दिन है।