स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी ने संतों का फूलमाला पहनाकर किया स्वागत
हरिद्वार के श्री दक्षिण काली मंदिर में संतों और भक्तों ने होली का त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में संतों ने अबीर-गुलाल उड़ाकर और एक-दूसरे को बधाई देकर होली मनाई।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख संत:
* आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज
* निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी महाराज
* महामंडलेश्वर स्वामी राममुनि
* महंत गोविंददास
* महामंडलेश्वर स्वामी सहजानंद पुरी
* स्वामी रविदेव शास्त्री
* स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि
* स्वामी दिनेश दास
* स्वामी शिवम महंत
* स्वामी अनंतानंद रामजी
* महंत राघवेंद्र दास
* स्वामी विपनानंद
* स्वामी नागेंद्र महाराज
* स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी
होली का महत्व:
स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने होली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और भक्ति की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने भक्त प्रह्लाद और होलिका की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार भगवान नारायण ने अपने भक्त की रक्षा की।
निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी और महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी ने कहा कि होली पर्व आंतरिक चेतना को जागृत कर जीवन में उमंग और उल्लास का संचार करता है। स्वामी रविदेव शास्त्री और स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि ने कहा कि रंगों और उमंगों का यह पर्व देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करता है।
स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज के शिष्य स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी ने सभी संतों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया और होली की शुभकामनाएं दीं।












