हरिद्वार संक्षिप्त: हरिद्वार के संत समाज से जुडी़ ख़बरें, यहां देखें

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टी. राजा सिंह की वापसी की मांग और भाजपा पर संभावित राजनीतिक नुकसान

हरिद्वार, 14 जुलाई: भाजपा को धार्मिक पदाधिकारियों के पार्टी छोड़ने से राजनीतिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। कई प्रमुख संतों ने भाजपा से निष्कासित विधायक टी. राजा सिंह की पार्टी में वापसी की मांग की है। संतों का यह सामूहिक रुख भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए। जिन संतों ने यह मांग उठाई है, उनमें महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी, स्वामी अनंतानंद गिरी, स्वामी सहजानंद पुरी, श्रीमहंत रामरतन गिरी, महंत राघवेंद्र दास, महंत सूर्याश मुनि, स्वामी गर्व गिरी, स्वामी ऋषिश्वरानंद, अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मुखिया महंत दुर्गादास, स्वामी पारस मुनि, सनातन हिंदू वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष अमित वालिया, महंत सूरज दास, महंत रघुवीर दास, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि, महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती, स्वामी निर्मल दास और स्वामी कपिल मुनि शामिल हैं।

श्रवणनाथ मठ स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में पूजन से पूरी होती हैं मनोकामनाएं: श्रीमहंत रविंद्रपुरी

हरिद्वार, 14 जुलाई: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने बताया कि सावन में भगवान शिव की आराधना से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। उन्होंने हरिद्वार को भगवान शिव की नगरी बताते हुए कहा कि यहां कई पौराणिक शिव मंदिर हैं, जहां जलाभिषेक और पूजा-अर्चना से अक्षय पुण्य मिलता है। विशेष रूप से, उन्होंने श्रवणनाथ मठ स्थित 500 वर्ष प्राचीन भगवान पशुपतिनाथ मंदिर का उल्लेख किया, जिसका निर्माण नेपाल के राजा ने कराया था। उनके अनुसार, सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं इस मंदिर में पूरी होती हैं, और यह भारत का पहला सिद्ध मंदिर है। इस मंदिर से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि यहां पूजा करने वाले भक्तों को नेपाल में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन अवश्य करने पड़ते हैं। इस अवसर पर श्रीमहंत रामरतन गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी, महंत दिनेश गिरी, महंत राजगिरी और स्वामी सहजानंद पुरी भी उपस्थित रहे।

शिव आराधना से होती है अंतःकरण की शुद्धि: स्वामी कैलाशानंद गिरी

हरिद्वार, 14 जुलाई: निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा है कि सावन में भगवान शिव की आराधना से मन और अंतःकरण दोनों की शुद्धि होती है। उन्होंने बताया कि शिव आराधना भक्तों की आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार करवाती है, जिससे मोक्ष का मार्ग खुलता है। श्रीमहाकाल दक्षिण काली मंदिर में विशेष शिव आराधना के दौरान उन्होंने कहा कि भगवान शिव आदि अनादि और निराकार हैं, और सृष्टि की उत्पत्ति व अंत के कारक हैं। शिव अपने भक्तों का संरक्षण करते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। उन्होंने यह भी जोर दिया कि श्रावण मास में शिव आराधना के साथ प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लेना चाहिए और अधिक से अधिक पौधारोपण करना चाहिए। स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि पूज्य गुरुदेव की शिव आराधना से देश में नई ऊर्जा का संचार होगा और समाज के कल्याण की भावना जागेगी।

गंगाजी केवल नदी नहीं, जीवनदायिनी संस्कृति हैं: स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 14 जुलाई: श्रावण मास के पहले सोमवार को परमार्थ निकेतन में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, नमामि गंगे और अर्थ गंगा अभियान के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय गंगाजी के प्रति जागरूकता और आरती कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य गंगा आरती की आध्यात्मिक गरिमा को सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय जागरूकता से जोड़ना था। इसमें देशभर के गंगा तट के पांचों राज्यों से पुरोहितों और पंडितों ने भाग लिया, जिन्हें गंगा आरती की पारंपरिक शैली, वैदिक महत्व, पर्यावरणीय संदेश और सामाजिक प्रभाव के बारे में प्रशिक्षित किया गया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि गंगाजी की आरती आस्था, श्रद्धा के साथ-साथ सेवा, संस्कृति और स्थायित्व की त्रिवेणी है। उन्होंने बताया कि गंगा आरती एक स्थानीय आर्थिक तंत्र का आधार भी है, जो रोजगार और पर्यटन के अवसर प्रदान करती है। स्वामी जी ने जोर देकर कहा कि गंगाजी केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की जीवंत आत्मा, संस्कृति, सभ्यता और सनातन परंपरा की आधारशिला हैं। उन्होंने संकल्प दिलाया कि जब तक गंगा बहेगी, भारत की आत्मा जीवित रहेगी, और जब तक यह आत्मा जीवित है, तब तक हम सबको आस्था और उत्तरदायित्व दोनों का दीपक जलाए रखना है। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने गंगा आरती में भाग लिया और जल व पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। स्वामी जी ने उन्हें रुद्राक्ष का पौधा देकर हरित पर्व व त्यौहार मनाने और एक पौधा अपनी माँ और एक धरती माँ के नाम रोपित करने का संकल्प कराया। इस कार्य कार्यशाला में नमामि गंगे के संचार विशेषज्ञ पूरन चन्द कापड़ी, परमार्थ निकेतन से गंगा नन्दिनी, वन्दना शर्मा, राकेश रोशन, उमाजी, आचार्य संदीप शास्त्री जी, आचार्य दिलीप क्षेत्री, ऋषिकुमार आयुष, परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमार का उत्कृष्ट योगदान रहा।