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शांतिकुंज में सामूहिक श्रावणी उपाकर्म संस्कार का आयोजन

रक्षाबंधन के पावन अवसर पर गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में हज़ारों साधकों ने सामूहिक श्रावणी उपाकर्म संस्कार में भाग लिया। इस दौरान प्रशिक्षित आचार्यों ने हेमाद्रि संकल्प और दश स्थान जैसे वैदिक कर्मकांडों को विधिवत पूरा करवाया।इस अवसर पर एक विशेष वृक्षारोपण अभियान की भी शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य देश भर में लाखों पौधे लगाना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रमुख शैलदीदी ने रक्षाबंधन को आत्मिक सुरक्षा, संयम और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक बताया। वहीं, कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि यह पर्व नारी शक्ति को सम्मान और सामर्थ्य देने की भारतीय संस्कृति की गहरी समझ को दर्शाता है।

पतंजलि ने धराली आपदा प्रभावितों के लिए भेजी राहत सामग्री

पतंजलि योगपीठ ने धराली, उत्तरकाशी में आई भीषण आपदा के पीड़ितों की मदद के लिए 3 ट्रक राहत सामग्री भेजी है। स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण और रामभरत ने सामग्री को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्वामी रामदेव ने कहा कि त्रासदी में जान गंवाने वालों को तो वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित 500 परिवारों की मदद के लिए रोजमर्रा की ज़रूरी चीज़ें जैसे आटा, चावल, दालें, तिरपाल, बर्तन आदि भेजी जा रही हैं।उन्होंने उत्तराखंड में होने वाली आपदाओं पर भी बात की और कहा कि हमें पुनः आत्मनिरीक्षण करना होगा कि यहां की बसावट कैसी हो ताकि बार-बार होने वाली जनहानि को रोका जा सके। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि परिवार हमेशा आपदा के समय देशवासियों के साथ खड़ा रहा है और इस बार भी वह प्रभावितों के साथ है।

हरकी पैड़ी पर तीर्थ पुरोहितों ने किया श्रावणी उपाकर्म

क्षाबंधन के मौके पर तीर्थ पुरोहितों ने हरकी पैड़ी पर श्रावणी उपाकर्म कार्यक्रम आयोजित किया। उन्होंने गंगा में हेमाद्रि संकल्प स्नान कर पूरे वर्ष उपयोग होने वाले यज्ञोपवीत और रक्षा सूत्रों का संधान व अभिसिंचन किया। श्रीगंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम और महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने बताया कि ये ही यज्ञोपवीत और रक्षासूत्र साल भर धार्मिक कार्यों में प्रयोग किए जाते हैं। उन्होंने इंद्राणी द्वारा देवगुरु बृहस्पति से रक्षासूत्र का अभिसिंचन कराकर इंद्र की कलाई पर बांधने और उसके बाद देवताओं की विजय होने की पौराणिक कथा का भी उल्लेख किया।