भाई-बहन के बीच प्रेम-त्याग और समर्पण का असली त्योहार है- भाई दूज का पर्व

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हरिद्वार:   राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण समिति की पूर्व राष्ट्रीय सचिव रेखा नेगी ने कहा कि भाई-बहन के बीच प्रेम-त्याग और समर्पण का यही असली त्योहार है,जहां भाई अपनी बहन को उसके शील की रक्षा का वचन देता है। बहनें भाई को आमंत्रित करती हैं, भाई को तिलक करके उनके मंगल जीवन की कामना करती हैं। उन्होंने बताया इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु,सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करती हैं। भाई दूज का पर्व दीपावली के दो दिन बाद आता है,माना जाता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना जी के घर गए थे,जहां यमुना जी ने उनका आदर-सत्कार कर उन्हें तिलक किया था।तभी से यह दिन भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक बन गया है।उन्होंने बताया ऋग्वेद में जैसा वर्णन आया है,ठीक वैसा ही विधान यम द्वितीया यानी भाई दूज के देखने को मिलता है। इस घटना का वर्णन ऋग्वेद के दशम मंडल के संवाद सू्क्त में किया गया है। इसी संवाद सूक्त में यम और उनकी बहन यमुना के बीच होने वाली बातचीत का उल्लेख है। संवाद सूक्त भारतीय व्यवस्था में परिवार के मूल्यों और आदर्शों को सामने रखता है साथ ही हर रिश्ते की कैसी मर्यादा होती है,उन्हें भी रेखांकित करता है।भाई-बहन के आपसी प्रेम और विश्वास का यह प्रतीक-पर्व हर किसी के जीवन में सुख,समृद्धि और सौभाग्य लेकर आए।