देहरादून: उत्तराखंड की मुख्य सचिव ने राज्य में एनएच (NH) और अन्य सड़क परियोजनाओं की धीमी प्रगति को लेकर कड़े तेवर अपनाए हैं। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने और समयबद्ध तरीके से प्रोजेक्ट्स पूरे करने के निर्देश दिए।
लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई
- प्रतिकूल प्रविष्टि: पिथौरागढ़–बागेश्वर NH 309A का प्रस्ताव केंद्र को भेजने में हुई देरी पर मुख्य सचिव ने जिम्मेदार अधिकारियों को ‘प्रतिकूल प्रविष्टि’ (Adverse Entry) देने के निर्देश दिए।
- विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि: काठगोदाम–नैनीताल एनएच के निर्माण हेतु वन एवं वन्यजीव स्वीकृतियों के डेटा अपलोड में लापरवाही बरतने पर अधिशासी अभियंता को ‘विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि’ देने के निर्देश दिए गए।
प्रमुख निर्देश और समयसीमा
- वन स्वीकृतियां: पेड़ों के छपान और कटान की प्रक्रिया में देरी पर नाराजगी जताते हुए इसे 31 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से शुरू करने को कहा गया।
- नियमित समीक्षा: जिलाधिकारियों (DMs) को लंबित परियोजनाओं की नियमित समीक्षा बैठकें करने और केंद्र सरकार के मंत्रालयों से लगातार फॉलोअप करने के निर्देश दिए गए।
- भूमि अधिग्रहण: सड़कों के निर्माण के लिए 3(G) और 3(D) की कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी लाने पर जोर दिया गया।
इन प्रोजेक्ट्स की हुई समीक्षा
बैठक में कोटद्वार बाईपास, झाझरा–आशारोड़ी, हरिद्वार–नजीबाबाद और देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की प्रगति की जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।














