हरिद्वार पुलिस ने एक चौंकाने वाले मामले में घटना के पूरे 25 महीने बाद मुकदमा दर्ज किया है। यह कोई मामूली घटना नहीं, बल्कि न्याय के मंदिर कहे जाने वाले कोर्ट परिसर के भीतर हुई है। एक जाने-माने सिविल अधिवक्ता ने अपने जूनियर के साथ मिलकर एक गवाह को बेरहमी से पीटा। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित के अनुसार यह शर्मनाक हरकत स्वयं जज के सामने हुई!
पीड़ित गवाह सुशील कुमार, जो मुखिया चोक गली, भूपतवाला हरिद्वार के निवासी हैं, ने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई है। उन्होंने बताया कि 17 मार्च 2023 को वह द्वितीय अपर सीनियर सिविल जज हरिद्वार के न्यायालय में एक पुराने मुकदमे (मूलवाद सं०- 17/2009 देवेन्द्र कुमार आदि बनाम रामदुलारी आदि) में प्रतिवादी संख्या-01 की ओर से गवाही देने के लिए पेश हुए थे।
सुशील कुमार के अनुसार, उनसे जिरह कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता और उनके जूनियर अधिवक्ता उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं हुए। इस पर दोनों वकील आगबबूला हो गए और गाली-गलौज करने लगे। आरोप है कि इसके बाद दोनों अधिवक्ताओं ने सुशील कुमार को थप्पड़, मुक्कों और लातों से पीटना शुरू कर दिया। जब लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो भी वे नहीं रुके, बल्कि पीडि़त सुशील कुमार को धमकियाँ देने लगे।
पीड़ित ने बताया कि यह पूरी घटना कोर्ट के अंदर, जज साहब के सामने हुई। सुशील कुमार ने अपनी अपाहिज मां के लिए भी चिंता जताई है, जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं और उसी मुकदमे में प्रतिवादी संख्या-1 हैं। उन्हें आशंका है कि भविष्य में होने वाली गवाही में ये दोनों अधिवक्ता उनकी मां के साथ भी मारपीट और बदतमीजी कर सकते हैं। सुशील कुमार ने पुलिस को बताया कि इन दोनों अधिवक्ताओं का व्यवहार अलग ही प्रवृत्ति का है और यह अधिवक्ताओं के आचरण के बिल्कुल विपरीत है।
अपनी शिकायत में सुशील कुमार ने पुलिस से गुहार लगाई है कि इन गंभीर तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपित अधिवक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि न्यायपालिका में लोगों का विश्वास बना रहे।
थाना सिडकुल जनपद हरिद्वार में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब देखना यह है कि इंसाफ के मंदिर में हुई इस अशोभनीय व्यवहार पर कानून क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित गवाह को न्याय मिल पाता है या नहीं। यह घटना निश्चित रूप से न्यायपालिका की गरिमा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
2025-04-17













