
उत्तराखंड को एक प्रमुख फिल्म निर्माण गंतव्य बनाने के उद्देश्य से नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) और उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद (UFDC) ने देहरादून में “उत्तराखंड में फिल्मिंग इकोसिस्टम के विकास” विषय पर एक संयुक्त कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला का उद्घाटन UFDC के सीईओ बंशीधर तिवारी, संयुक्त सीईओ डॉ. नितिन उपाध्याय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की फिल्म निदेशक शिल्पा राव और NFDC के महाप्रबंधक अजय धोके ने किया। इसका मुख्य फोकस राज्य में फिल्म निर्माण के लिए नीतिगत सुधार, बुनियादी ढांचे के विकास और प्रतिभा संवर्धन पर था।
UFDC के सीईओ बंशीधर तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड को फिल्म निर्माण हब बनाने का प्रयास जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड की फिल्म नीति क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है, जिसके तहत क्षेत्रीय सिनेमा के लिए अनुदान 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे अब तक 20 से 25 गुणवत्तापूर्ण क्षेत्रीय फिल्में बन चुकी हैं।
UFDC के संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. नितिन उपाध्याय ने उत्तराखंड की नई फिल्म नीति पर प्रकाश डाला, जिसके मुख्य स्तंभ “प्रतिभा, प्रशिक्षण और तकनीक” हैं। इस नीति का उद्देश्य बाहरी निर्माताओं को आकर्षित करने के साथ-साथ स्थानीय कहानीकारों और तकनीशियनों को भी बढ़ावा देना है। उन्होंने उत्पादन अनुदान, लोकेशन पर सहयोग, फिल्म संस्थानों की स्थापना, मल्टीप्लेक्स और सिनेमा स्क्रीन निर्माण, तथा वन एवं सार्वजनिक स्थलों पर फिल्मांकन के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस जैसी सुविधाओं की जानकारी दी।
इंडिया सिने हब के सहायक उपाध्यक्ष राम कुमार विजयन ने ‘इंडियन सिने हब’ पोर्टल की विशेषताओं पर बात की, जो विभिन्न सरकारी अनुमतियों को प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाता है।
कार्यशाला के अंत में एक प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें फिल्म निर्माताओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। इससे पहले, NFDC और UFDC के वरिष्ठ अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक हुई, जिसमें उत्तराखंड को एक सशक्त फिल्म निर्माण केंद्र बनाने, सिनेमा हॉल के बुनियादी ढांचे का विस्तार करने, क्षेत्रीय फिल्मों को बढ़ावा देने और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को गति देने पर विस्तृत चर्चा हुई।













