प्रेस क्लब हरिद्वार में हिंदी पत्रकारिता दिवस पर द्विशताब्दी समारोह; एआई के दौर में भी प्रिंट मीडिया और भारतीय भाषाओं की प्रासंगिकता पर दिग्गजों ने रखे विचार

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हरिद्वार के प्रेस क्लब में हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक भव्य द्विशताब्दी समारोह और संगोष्ठी का आयोजन किया गया। निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि व पूर्व मुख्यमंत्री तथा पूर्व राज्यपाल पद्मभूषण से सम्मानित भगत सिंह कोश्यारी, मुख्य वक्ता व मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर गोविंद सिंह, प्रेस क्लब के अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी और महामंत्री सूर्यकांत बेलवाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

​इस विशेष अवसर पर पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट और उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ पत्रकार गोपाल रावत को स्वर्गीय मधुकांत प्रेमी स्मृति पुरस्कार और राहुल वर्मा को स्वर्गीय पीएस चौहान स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके साथ ही पत्रकारिता की पढ़ाई में सर्वोच्च और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल देकर प्रोत्साहित किया गया।

​’हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली 200 वर्ष एवं मीडिया काउंसिल की अपरिहार्यकर्ता’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता प्रोफेसर गोविंद सिंह ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित करने के लिए प्रेस क्लब हरिद्वार पूरी तरह बधाई का पात्र है। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के संघर्षपूर्ण इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शुरुआती दौर में देश में केवल अंग्रेजी के अखबार चलते थे, जिनके कर्मचारी और पाठक दोनों अंग्रेज ही होते थे। इसके बाद बांग्ला, फारसी और उर्दू के अखबार शुरू हुए। अखबारों की जननी कहे जाने वाले कोलकाता से जुगल किशोर शुक्ल ने साल 1826 में ‘उदंत मार्तंड’ नाम से पहला हिंदी भाषी साप्ताहिक अखबार शुरू किया था। मात्र डेढ़ साल चलने के बावजूद इस अखबार ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने गहरे मापदंड और छाप छोड़ी। इसके बाद 1857 की क्रांति और 1935 के बाद देश की आजादी की लड़ाई में हिंदी पत्रकारिता ने ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आजादी के बाद इस उम्मीद में बड़ी संख्या में हिंदी अखबार शुरू हुए कि हिंदी भारत की राजभाषा बनेगी। आपातकाल (इमरजेंसी) के बाद हिंदी पत्रकारिता में व्यापक सुधार हुआ और नब्बे के दशक के बाद टीवी व डिजिटल मीडिया का युग आया, जिसने लोगों को लिखने की स्वतंत्रता तो दी, लेकिन इसमें कई खामियां भी आईं। इन तमाम बदलावों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर के बावजूद प्रिंट मीडिया ने आज भी समाज में अपनी विश्वसनीयता को पूरी तरह कायम रखा है।

​मुख्य अतिथि और पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सभी आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए प्रेस क्लब हरिद्वार को उत्तराखंड का एक आदर्श प्रेस क्लब बताया। उन्होंने कहा कि मां गंगा के पावन तट पर अब वर्नाकुलर और भाषायी प्रेस जैसे औपनिवेशिक शब्द विलुप्त हो जाएंगे। अब समय आ गया है कि अपने अस्तित्व के लिए भारतीय भाषाओं को मजबूती से आगे बढ़ाया जाए और ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जाए जो नई पीढ़ी का सही मार्गदर्शन कर सकें। कोलकाता से दो सौ साल पहले शुरू हुआ ‘उदंत मार्तंड’ यह प्रकट करता है कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब चेन्नई से भी हिंदी पत्रकारिता का जोरदार उदय होगा। उन्होंने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री अंग्रेजी माहौल में पढ़े थे, जिसके कारण जनता भी उसी माहौल का अनुसरण करने लगी थी, लेकिन आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक मंचों पर ट्रंप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय नेताओं से हिंदी में बात करते हैं। यही कारण है कि अब दुनिया के अन्य लोगों को भी हिंदी सीखने की आवश्यकता आन पड़ी है। वर्तमान में महाराष्ट्र और गुजरात जैसे गैर-हिंदी भाषी राज्यों में भी बेहद बेहतर हिंदी बोली जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के आधुनिक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के युग में भी हम प्रिंट मीडिया के बिना नहीं रह सकते हैं, क्योंकि भारत के भीतर जो आध्यात्मिक इंटेलिजेंस है, उसका कोई विकल्प नहीं है और उसकी पहुंच बहुत आगे तक है। आज देश विकास और विरासत की दिशा में आगे बढ़ रहा है और वह खुद भी मायानगरी मुंबई को छोड़कर मायापुरी हरिद्वार में आए हैं। वह दिन दूर नहीं जब अखंड भारत का सपना साकार होगा और उसमें मायापुरी का भी महत्वपूर्ण योगदान होगा।

​समारोह की अध्यक्षता कर रहे आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने सभी को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि पत्रकारिता हमेशा समाज को आईना दिखाने का काम करती है। समाज में घट रही घटनाओं को पूरी प्रामाणिकता और विश्वसनीयता के साथ जनता के सामने रखना ही सच्ची पत्रकारिता है। पत्रकारों को पूरी निर्भीकता के साथ अपने मिशन को पूरा करना चाहिए, क्योंकि जब सच्चाई समाज के सामने आएगी तभी देश मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि प्रेस क्लब से जुड़े सभी पत्रकार समाज के सजग प्रहरी के रूप में अपना निरंतर योगदान दे रहे हैं। हिंदी पत्रकारिता के बीते दो सौ वर्ष बेहद गौरवपूर्ण रहे हैं और अब अगली पीढ़ी का यह नैतिक दायित्व है कि वह इस गौरवमयी विरासत को और आगे ले जाए।

​प्रेस क्लब के अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी और महामंत्री सूर्यकांत बेलवाल ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली सफर को याद करने के लिए श्रृंखला बद्ध कार्यक्रमों का आयोजन लगातार संचालित किया जा रहा है। आज पूरे समाज को हिंदी के महत्व और उसकी ताकत को गहराई से समझने की आवश्यकता है। मीडिया जगत लगातार हिंदी भाषा को वैश्विक स्तर पर प्रसिद्धि और पहचान दिलाने में अपनी निर्णायक भूमिका निभा रहा है। इसके बाद उन्होंने मंच पर मौजूद सभी अतिथियों को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया तथा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आभार जताया।

इस भव्य कार्यक्रम का कुशल संचालन वरिष्ठ पत्रकार दीपक नौटियाल ने किया। इस गौरवपूर्ण द्विशताब्दी समारोह और संगोष्ठी के अवसर पर संयोजक समिति के सुनील दत्त पांडे, आदेश त्यागी, दीपक नौटियाल, काशीराम सैनी, मेहताब आलम, गुलशन नैय्यर, श्रवण झा, रामचंद्र कन्नौजिया, अमित शर्मा, नरेश गुप्ता, राजकुमार, दीपक मिश्रा, डॉ. शिवा अग्रवाल, सुनील पाल, बालकृष्ण शास्त्री, आशीष मिश्रा, नरेश दीवान शैली, रोहित सिखौला, आनंद गोस्वामी, परमजीत सिंह राणा, एसके अरोड़ा, रूपेश वालिया, लव शर्मा, रामेश्वर शर्मा, महेश पारीख, कुलभूषण शर्मा, राधिका नागरथ, मंजू नेगी, कुमकुम शर्मा, प्रतिभा वर्मा, सुनील मिश्रा, संदीप शर्मा, संजीव शर्मा, केके पालीवाल, गोपाल कृष्ण पटुवर, संजय रावल, जोगेंद्र मावी, सुभाष कपिल, राजेंद्र नाथ गोस्वामी, चंद्रशेखर जोशी, कौशल सिखोला, महावीर नेगी, मुदित अग्रवाल, मनोज सोही, अमित गुप्ता और त्रिलोकचंद्र भट्ट, सतीश गुजराल, रामेश्वर शर्मा, अश्विनी अरोड़ा, मुदित अग्रवाल , चंद्रशेखर जोशी , महावीर नेगी, चंद्रशेखर गोस्वामी, सहित मीडिया जगत से जुड़े भारी संख्या में पत्रकार, बुद्धिजीवी और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।