हरिद्वार, (आदेश त्यागी): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कुंभ मेला 2027 को भव्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन तैयारियों की शुरुआत में ही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री की नाराज़गी खुलकर सामने आ गई है।
जूना अखाड़ा की घटना दर्शाती है कि कुंभ व्यवस्था को लेकर अखाड़ों ने अप्रत्यक्ष रूप से मेला अधिष्ठान के खिलाफ अघोषित मोर्चा खोल दिया है।
मुख्य बिंदु:
- संपर्क का अभाव: अखाड़ा परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मेला अधिकारी कार्यालय के किसी भी व्यक्ति ने कुंभ व्यवस्थाओं को लेकर अखाड़ों से संपर्क नहीं किया है।
- जूना अखाड़े का रुख: नाराज़गी के चलते जूना अखाड़े ने घोषणा कर दी थी कि वह हरिद्वार 2027 कुंभ में भाग नहीं लेगा।
- हस्तक्षेप और राहत: ख़बर फैलते ही अर्ध कुंभ मेला अधिकारी दयानंद सरस्वती तुरंत जूना अखाड़े पहुंचे, जिसके बाद जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरि गिरी महाराज ने अपना वक्तव्य वापस लिया और मेला अधिष्ठान को राहत मिली।
- मेला अधिकारी से मुलाकात नहीं: मेला अधिकारी सोनिका ने अभी तक अखाड़ों के महंतों, महामंडलेश्वरों से मुलाकात और कुंभ की तैयारियों पर चर्चा नहीं की है, जिस पर महंत हरि गिरी महाराज ने नाराज़गी जताई है।
- तैयारियों को ग्रहण: सिंचाई विभाग का घाट बह जाने और अब अखाड़ों की नाराज़गी से कुंभ मेला 2027 की तैयारियों को शुरू में ही झटका लगा है।














