हरिद्वार, 12 अगस्त। साहित्यकार एवं हिंदी भाषा के महान विद्वान आचार्य किशोरीदास वाजपेयी की पुण्यतिथि पर प्रेस क्लब हरिद्वार से जुड़े पत्रकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कनखल चौक तथा प्रेस क्लब परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर पत्रकारों ने उनके साहित्यिक और भाषायी योगदान को स्मरण किया।
इस अवसर पर प्रेस क्लब सभागार में साहित्यिक गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में पत्रकारों ने आचार्य वाजपेयी के जीवन, साहित्य और हिंदी भाषा के विकास में उनके योगदान पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि आचार्य किशोरीदास वाजपेयी हिंदी भाषा और व्याकरण के महान विद्वानों में गिने जाते हैं। उन्हें हिंदी का पाणिनि और आधुनिक पाणिनि भी कहा जाता है। उन्होंने हिंदी को वैज्ञानिक आधार प्रदान करते हुए यह स्थापित किया कि हिंदी केवल संस्कृत की अनुगामी भाषा नहीं, बल्कि अपनी स्वतंत्र पहचान, प्रकृति और व्याकरणिक स्वरूप रखने वाली समृद्ध भाषा है। पत्रकारिता में शुद्ध और स्पष्ट हिंदी के प्रयोग को लेकर उनके विचार आज भी प्रेरणादायी हैं।
महासचिव सूर्यकांत बेलवाल ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा देने में आचार्य वाजपेयी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने सरल, सहज, सुबोध और शुद्ध हिंदी के प्रयोग पर जोर दिया। वर्तमान समय में हिंदी में अंग्रेजी और संस्कृत के अनावश्यक मिश्रण के बढ़ते चलन के बीच उनके विचारों को पुनः अपनाने की आवश्यकता है।
वरिष्ठ पत्रकार आदेश त्यागी और सुनील दत्त पांडे ने कहा कि आचार्य वाजपेयी ने हिंदी व्याकरण को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जनभाषा से जोड़ा। उनका मानना था कि पत्रकारिता की भाषा ऐसी हो, जिसे आम जनता सहजता से समझ सके। उनकी पुण्यतिथि हमें अपनी मातृभाषा हिंदी के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देती है।
वरिष्ठ पत्रकार रामचंद्र कन्नौजिया और दीपक नौटियाल ने कहा कि जिस प्रकार महर्षि पाणिनि ने संस्कृत को वैज्ञानिक व्याकरण प्रदान किया, उसी प्रकार आचार्य किशोरीदास वाजपेयी ने आधुनिक हिंदी की प्रकृति और व्याकरणिक स्वरूप को समझने तथा व्यवस्थित करने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनका स्पष्ट मत था कि हिंदी संस्कृत से प्रभावित होने के बावजूद एक स्वतंत्र भाषा है और उसके अपने व्याकरणिक नियम तथा भाषिक स्वभाव हैं। इसलिए संस्कृत के नियमों को बिना विचार किए हिंदी पर लागू करना उचित नहीं है।
गोष्ठी में काशीराम सैनी, श्रवण झा, बालकृष्ण शास्त्री, जोगेंद्र सिंह मावी, राजकुमार, नवीन चौहान, डॉ. शिवा अग्रवाल, अमित गुप्ता, महेश पारीक, बृजपाल सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश जोशी, बृजेन्द्र हर्ष, ललितेंद्र नाथ, रामेश्वर दयाल शर्मा, रूपेश वालिया, कुलभूषण शर्मा, लव शर्मा, मेहताब आलम सहित प्रेस क्लब से जुड़े अनेक पत्रकार उपस्थित रहे।













