हरिद्वार। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में सोमवार को कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘वीआईपी’ के नाम का खुलासा करने की मांग को लेकर जिलाधिकारी कैंप कार्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने संबोधित करते हुए कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना पूरे प्रदेश का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकरण में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं, जिन्हें देखते हुए इसकी जांच हाईकोर्ट के वर्तमान जज की निगरानी में सीबीआई से कराई जानी चाहिए। रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में महिलाओं पर अत्याचार बढ़े हैं और कई अपराधों में सत्ताधारी दल के नेताओं की संलिप्तता दिख रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता के अहंकार में उत्तराखंड की संस्कृति से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विधायक अनुपमा रावत और रवि बहादुर ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाली सरकार के राज में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अंकिता के परिवार को अब तक पूर्ण न्याय नहीं मिला है और जब तक दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिलती, संघर्ष जारी रहेगा।
इस विरोध प्रदर्शन में विधायक वीरेंद्र जाती, वीरेंद्र रावत, कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालेश्वर सिंह, महानगर अध्यक्ष अमन गर्ग सहित सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच से कम उन्हें कुछ भी स्वीकार्य नहीं है। धरने में मुख्य रूप से आशीष गोस्वामी, रविश भटीजा, पूनम भगत, राजबीर सिंह चौहान, बालेश्वर सिंह समेत भारी संख्या में स्थानीय नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।














