जनरेटर चालान विवाद पर हरिद्वार में बवाल, बाजार बंद; नगर निगम और व्यापारियों में आरोप-प्रत्यारोप

Listen to this article

मुक्ति-मोद ब्यूरो, हरिद्वार

हरिद्वार। थाना कोतवाली हरिद्वार क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान नगर निगम और व्यापारियों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि पूरे बाजार में तनाव का माहौल बन गया। एक व्यापारी द्वारा दुकान के बाहर जनरेटर रखे जाने पर नगर निगम की टीम ने चालान काटकर जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाने के अभियान पर निकली हुई थी। इसी दौरान एक दुकान के बाहर रखा जनरेटर निगम अधिकारियों की नजर में आया और उसे अतिक्रमण मानते हुए चालान की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई का व्यापारियों ने विरोध किया और देखते ही देखते विवाद बढ़ गया।

व्यापारियों का आरोप है कि कहासुनी के बाद नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने संबंधित व्यापारी की दुकान के सामने कूड़ा डलवा दिया, जिससे दुकान तक पहुंचने का रास्ता अवरुद्ध हो गया। इस घटना से व्यापारियों में भारी रोष फैल गया और विरोध स्वरूप बाजार बंद कर दिया गया।

दूसरी ओर नगर निगम प्रशासन का दावा है कि अभियान के दौरान निगम कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। निगम अधिकारियों का आरोप है कि चालान बुक छीनने का प्रयास किया गया तथा सरकारी कार्य में बाधा डाली गई। मामले को गंभीर मानते हुए उप नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी ने नगर कोतवाली हरिद्वार में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।

विवाद के बाद व्यापारिक संगठनों ने उप नगर आयुक्त को निलंबित किए जाने की मांग उठाई है। वहीं निगम कर्मचारियों का भी कहना है कि उनके साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी मांगों पर अड़े हुए बताए जा रहे हैं, हालांकि प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति फिलहाल शांत है।

सबसे अधिक नुकसान आम जनता और व्यापारियों का

इस पूरे विवाद में सबसे अधिक परेशानी आम जनता को उठानी पड़ी। बाजार बंद होने से खरीदारी के लिए आए लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। वहीं व्यापारियों को भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। कई दुकानों का कारोबार प्रभावित हुआ और बाजार का सामान्य संचालन घंटों तक बाधित रहा।

कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

घटना के बाद एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी सामने आया है। नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान क्या उनके साथ कोई मजिस्ट्रेट स्तर का अधिकारी मौजूद था? आमतौर पर संवेदनशील अतिक्रमण हटाओ अभियानों में सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम, तहसीलदार अथवा अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है, ताकि किसी भी विवाद की स्थिति में मौके पर ही वैधानिक निर्णय लिया जा सके।

अब यह मामला केवल चालान या अतिक्रमण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली, व्यापारियों के अधिकारों और प्रशासनिक समन्वय पर भी सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और प्रशासनिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक जिम्मेदारी किस पक्ष पर है।