हरिद्वार:
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रसेवा, सुशासन और लोककल्याण को समर्पित सफल 12 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पूर्ण होने पर जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने एक विशेष संदेश जारी किया है। स्वामी जी ने इस कालखण्ड को भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय पुनर्जागरण का ‘स्वर्णिम अध्याय’ बताया है।
हिन्दू धर्म आचार्य सभा के अध्यक्ष स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में जिस ‘राजर्षि’ (शासन के साथ आध्यात्मिकता और नैतिकता का समन्वय) की परिकल्पना की गई है, पीएम मोदी उसके समकालीन संवाहक हैं। उन्होंने मोदी जी की तुलना सम्राट विक्रमादित्य, महाराज हर्षवर्धन और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जैसे ऐतिहासिक लोकनायकों से की, जिन्होंने सदैव धर्मसम्मत शासन और जनकल्याण को सर्वोपरि रखा।
विकास और विरासत का अद्भुत समन्वय
स्वामी जी ने अपने संदेश में रेखांकित किया कि पिछले 12 वर्षों (4,399 दिनों) में देश ने ‘विकास भी और विरासत भी’ के मूलमंत्र को साकार होते देखा है। इस दौरान देश में हुए युगांतरकारी परिवर्तनों को मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं के अंतर्गत देखा जा सकता है:
- ऐतिहासिक सांस्कृतिक पुनर्जागरण: अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास, महाकाल लोक का विस्तार और केदारनाथ धाम का पुनरोद्धार जैसे कार्यों ने करोड़ों भारतीयों के सांस्कृतिक आत्मविश्वास को नई ऊर्जा दी है।
- अन्त्योदय और जनकल्याण: समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाने के लिए ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’, ‘आयुष्मान भारत’, ‘उज्ज्वला योजना’, ‘जल जीवन मिशन’ और ‘जनधन योजना’ जैसी नीतियों ने करोड़ों परिवारों के जीवन स्तर को सुधारा है।
- अभूतपूर्व अवसंरचना (Infrastructure): वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार, आधुनिक एक्सप्रेसवे, नए हवाई अड्डों का निर्माण और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत आज विश्व का नेतृत्व कर रहा है।
- सुरक्षा और आत्मनिर्भरता: सीमाओं की अभेद्य सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति ने वैश्विक पटल पर भारत की धाक जमाई है।
वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता गौरव
जी-20 की सफल अध्यक्षता और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की सनातन भावना को वैश्विक कूटनीति के केंद्र में लाने का श्रेय प्रधानमंत्री को देते हुए स्वामी जी ने कहा कि आज भारत दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से खड़ा है। यह केवल एक कूटनीतिक सफलता नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतीय सभ्यता की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक है।
140 करोड़ भारतीयों के पुरुषार्थ की गाथा
स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी ने कहा कि यह 12 वर्षों की यात्रा केवल सरकार की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक पुरुषार्थ, अटूट विश्वास और नवसंकल्प की गाथा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन को ‘कर्मयोग’ का जीवंत उदाहरण बताते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर राष्ट्रसेवा की मंगलकामना की है।













