“मुक्ति मोद”प्रात:कालीन उत्तराखंड समाचार बुलेटिन

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उत्तराखंड में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में लगातार बदलते मौसम ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में कई जिलों में भारी बारिश, तेज गर्जना, आकाशीय बिजली और भूस्खलन की चेतावनी जारी किए जाने के बाद राज्य सरकार और जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन टीमों को सक्रिय कर दिया गया है तथा नदियों और बरसाती नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
  देहरादून में बारिश और अव्यवस्थित सड़कों से बढ़ी परेशानी
राजधानी देहरादून में मानसून की शुरुआती बारिश ने नगर निगम और निर्माण एजेंसियों की तैयारियों की पोल खोल दी है। शहर की कई प्रमुख सड़कें खुदी होने के कारण लोगों को भारी जाम और जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में सीवर और पेयजल लाइन के कार्य अधूरे पड़े हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है। प्रशासन ने संबंधित विभागों को जल्द कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
हरिद्वार में कांवड़ यात्रा और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां तेज
हरिद्वार में आगामी कांवड़ यात्रा और धार्मिक आयोजनों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था मजबूत करनी शुरू कर दी है। हरकी पैड़ी सहित प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पुलिस और प्रशासन की टीमें भीड़ नियंत्रण, पार्किंग और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर लगातार बैठकें कर रही हैं। मानसून के चलते गंगा का जलस्तर भी धीरे-धीरे बढ़ने लगा है।
नैनीताल और कुमाऊं क्षेत्र में पर्यटन के साथ सतर्कता
नैनीताल, भीमताल और आसपास के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी मार्गों पर फिसलन और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। प्रशासन द्वारा पर्यटकों से सावधानीपूर्वक यात्रा करने की अपील की गई है। कई संवेदनशील स्थानों पर पुलिस और आपदा राहत दल तैनात किए गए हैं।
चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष निगरानी
उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में चारधाम यात्रा जारी है। यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ मार्गों पर मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश और मलबा गिरने की घटनाओं को देखते हुए मशीनें और राहत दल तैयार रखे गए हैं। यात्रियों को मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है।
पर्वतीय जिलों में भूस्खलन और सड़क बाधित होने की आशंका
पौड़ी, टिहरी, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत जैसे पर्वतीय जिलों में भारी बारिश के चलते भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है। प्रशासन द्वारा संवेदनशील सड़कों और पुलों की निगरानी की जा रही है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन राहत सामग्री भी पहुंचाई गई है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
किसानों के लिए राहत लेकर आया मानसून
ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और तराई क्षेत्रों में मानसून किसानों के लिए राहत लेकर आया है। कृषि विभाग ने किसानों को धान रोपाई और खरीफ फसलों की तैयारियां तेज करने की सलाह दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी की गतिविधियां बढ़ने लगी हैं और किसान अच्छी बारिश की उम्मीद कर रहे हैं।
सरकार ने सभी जिलों को जारी किए सतर्कता निर्देश
राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और आपदा प्रबंधन अधिकारियों को चौबीस घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। नदी किनारे बसे गांवों, संवेदनशील पहाड़ी मार्गों और पर्यटन स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं और बिजली विभाग को भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
प्रदेशभर में मानसून के सक्रिय होते ही जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने आपदा प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है।